कागजों में उलझी जनसुनवाई; 12 हजार से ज्यादा शिकायतें, 8832 पर अफसरों के जवाब नहीं; 17 विभागों ने एक भी शिकायत का नहीं दिया जवाब

इंदौर में हर मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई में शिकायतों का अंबार लगता जा रहा है। जनसुनवाई में आम जनता द्वारा की गई शिकायतों का निराकरण नहीं हो रहा है। कलेक्टरेट से मिली जानकारी के अनुसार हर महीने लगभग 1400 आवेदक शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। सितंबर-अक्टूबर 2025 से अब तक 12 हजार 227 से ज्यादा शिकायतें जनसुनवाई में पहुंची हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 2 हजार 978 शिकायतों का ही निराकरण किया गया है। 8 हजार 832 शिकायतों पर अब तक कोई जवाब दर्ज नहीं किया गया है।
इंदौर में जनसुनवाई के दौरान हर मंगलवार 350 से अधिक शिकायतें आती हैं। कलेक्टर मौके पर अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश देते हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी शिकायतों का निराकरण नहीं कर रहे हैं। जनआकांक्षा रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन का एक बड़ा हिस्सा शिकायतों का समाधान करने के बजाय उन्हें फाइलों में दबाने में व्यस्त है। विभागीय आंकड़ों में नगर निगम, ग्रामीण तहसीलों और पुलिस विभाग की स्थिति सबसे अधिक निराशाजनक है। नगर निगम की 1 हजार 732 शिकायतों में से 1 हजार 293 लंबित पड़ी हैं। एसडीएम मल्हारगंज की 582 में से 328 शिकायतों पर जवाब नहीं मिला है। सबसे चौंकाने वाला रिकॉर्ड एसडीएम सांवेर का है, जहां 564 शिकायतों में से एक का भी जवाब दर्ज नहीं हुआ। पुलिस विभाग में एडीसीपी जोन-4 की 479, जोन-3 की 380 और ग्रामीण पुलिस अधीक्षक की 336 शिकायतों पर शून्य कार्रवाई दर्ज है। वहीं एडीसीपी जोन-1 की 472 में से केवल एक और एसडीएम देपालपुर की 323 में से सिर्फ एक शिकायत पर जवाब दिया गया है। कुल 17 विभाग ऐसे हैं, जिन्होंने एक भी शिकायत का जवाब देना जरूरी नहीं समझा।
कई मामलों में विभागीय कार्रवाई पूरी हो चुकी
वहीं इस पूरे मामले को लेकर अलग-अलग अधिकारियों का तर्क है कि रिपोर्ट में लंबित दिख रही सभी शिकायतें लापरवाही का परिणाम नहीं हैं। अधिकारियों के अनुसार कई मामलों में विभागीय कार्रवाई पूरी हो चुकी है, लेकिन शिकायतकर्ता समाधान से संतुष्ट नहीं होने के कारण प्रकरण बंद नहीं हो पा रहे हैं। इसके अलावा कुछ शिकायतें ऐसी हैं जो शासन स्तर से बजट या स्वीकृति मिलने पर ही हल हो सकती हैं, इसलिए वे तकनीकी रूप से लंबित दिखाई दे रही हैं। इसके बावजूद महिला एवं बाल विकास, पुलिस, शिक्षा, सामाजिक न्याय, खाद्य, स्वास्थ्य, बिजली और राजस्व जैसे प्रमुख विभागों में सैकड़ों शिकायतें दर्ज हो रही हैं, जिन पर कोई जवाब नहीं है।