इंदौर गैस लाइन ब्लास्ट: निगम जांच में पार्षद बालमुकुंद सोनी पर उठे सवाल, पुलिस की कार्यशैली पर हाईकोर्ट सख्त
इंदौर के सत्ताधारी दल के नेता बालमुकुंद सोनी वार्ड 31 के पार्षद है। 23 जून को बोरिंग करने के दौरान अवंतिका गैस लाइन ब्लास्ट हो गया था। इस ब्लास्ट में 4 लोग झुलस गया थे। नगर निगम जांच रिपोर्ट में सामने आया कि पार्षद सीधे तौर पर जिम्मेदार दिखाई देते है। पुलिस की ओर से भी ढीला रवैया भी देखने को मिल रहा है।
इंदौर हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए है
इस मामले को लेकर इंदौर हाईकोर्ट ने सख्ती की है और पुलिस की कार्यशैली पर नाराजगी जाहिर करते हुए एसीपी विजयनगर को तलब किया है। इस हादसे के बाद अधिवक्ता रितेश इनानी ने जनहित याचिका दायर की है। इसके तहत घायलों को मुफ्त उपचार दिया जा रहा है और एक युवती को अहमदाबाद एयरलिफ्ट किया गया है। हाईकोर्ट में जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होने की बात भी उठी, इस पर पुलिस से जवाब मांगा गया।
कोर्ट ने दस दिन में जांच पूरी करने के लिए कहा था लेकिन विजयनगर पुलिस ने कहा कि पार्षद बयान देने नहीं आ रहे हैं। वहीं जब्त मशीन छोड़ने पर भी नाराजगी जताई। अब इसमें अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी और एसीपी से जवाब मांगा है।
नगर निगम की जांच रिपोर्ट में पार्षद ही जिम्मेदार
इस मामले में निगमायुक्त आईएएस क्षितिज सिंघल ने अपर आयुक्त आकाश पाठक, कार्यपालन यंत्री असित खरे और पीएस कुशवाह की एक जांच समिति बनाई थी। रिपोर्ट में बताया गया है कि जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत भू-जल स्तर बढ़ाने के लिए रिचार्जिंग शाफ्ट बनाए जा रहे हैं। इसके लिए जमीन में बोरिंग की जाती है। सुमन नगर में जिस जगह बोरिंग का काम किया जा रहा था, वह जगह निगम की मंजूर सूची में शामिल नहीं थी। इस काम के लिए नगर निगम से कोई अनुमति भी नहीं ली गई थी। मौके पर निगम का कोई अधिकारी या इंजीनियर भी मौजूद नहीं था। वहां सिर्फ वेंडर के कर्मचारी और पार्षद सोनी मौजूद थे।
पार्षद ने ही बुलाई थी बोरिंग मशीन
जांच कमेटी ने निगम के टीना सिसोदिया, उजमा खान, मनीष मेहता, रोहित बोयत के साथ ही एसआरसी कंस्ट्रक्शन कंपनी के राजेश चाचरा और बोटिंग मशीन एजेंट कपिल शर्मा के भी बयान लिए। इसमें आया कि चाचरा ने ही बोरिंग मशीन एजेंट कपिल को पार्षद का नंबर दिया और कहा कि जहां वह बोलें बोरिंग लगा देना। पार्षद ने सुमन नगर पर बोरिंग बुलाई और वहां जगह बताते हुए बोरिंग करने के लिए कहा।
इसमें कोई तकनीकी जांच आदि नहीं की और बोरिंग लगाते ही नीचे अवंतिका गैस लाइन होने से ब्लास्ट हो गया। कर्मचारियों के बयानों में यह भी आया कि इससे पहले भी पार्षद ने अपने निवास की गली के पास ही रिचार्जिंग शाफ्ट बनाने के लिए कहा जो हमने उपयुक्त नहीं होने से मना कर दिया था। फिर उन्होंने अपने स्तर पर ही बोरिंग बुलाकर सुमन नगर में करा ली।
पुलिस ने केवल बोरिंग वाले पर ही किया केस
इस मामले में लेटलतीफी के बाद अन्य तीसरे व्यक्ति (चार झुलसे पीड़ितों के अलावा एक अन्य व्यक्ति) के आवेदन पर सामान्य धाराओं में केस कर लिया। इसके बाद बोरिंग मशीन जब्त की और उनके ही कर्मचारी को इसमें आरोपी बनाया। लेकिन जिला कोर्ट के आदेश से वह बोटिंग मशीन भी छूट गई। हाईकोर्ट ने अब पूरी पुलिस डायरी और अधिकारियों को बुलाया है।