“प्रदेश प्रकाश इंटरव्यू” कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय बोले; मेरा बस चलता तो इस साल भी 51 लाख पौधे लगाता…

देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर को अब हरियाली और जल संरक्षण में भी नंबर वन बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रदेश प्रकाश से विशेष बातचीत में मप्र सरकार के कैबिनेट मंत्री व बीजेपी के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि इस बार शहर और ग्रामीण इलाकों को मिलाकर साढ़े 22 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही भीषण जल संकट से निपटने के लिए 51 हजार घरों में रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का महाअभियान चलाया जा रहा है। पढ़िए, प्रदेश प्रकाश से विशेष बातचीत में कैलाश विजयवर्गीय ने क्या कुछ कहा…
सवाल – 21 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य बड़ा है, यह कैसे इम्प्लीमेंट होगा?
जवाब – देखिए, यह जन सहयोग से इम्प्लीमेंट होगा और नगर निगम इसमें मुख्य भूमिका अदा करेगा। हमने नगर निगम को दायित्व दिया है कि वह शहर के अंदर साढ़े 11 लाख पेड़ लगाए, वहीं हम बाकी ग्रामीण क्षेत्र में पेड़ लगाएंगे। खास बात यह है कि हम बड़े पेड़ लगा रहे हैं, क्योंकि छोटे-छोटे पेड़ देर से डेवलप होते हैं। इसलिए हम 6 फुट से लेकर 10 फुट तक के बड़े पेड़ ला रहे हैं। पानी की व्यवस्था हमने यशवंत सागर से की है। हम वहां से पानी लेकर आ रहे हैं।

सवाल – इंदौर के किस-किस इलाकों में ये पौधे लगाए जाएंगे?
जवाब – इंदौर में हमने अलग-अलग स्थान चुने हैं। जैसे देवगुराड़िया के पीछे दतूनी टेकरी है। वहां पर भी हम सवा लाख से ज्यादा पेड़ लगा रहे हैं। अभी 17 हजार गड्ढे वहां हो चुके हैं। इसके अलावा बिलावली टैंक के पीछे, सिरपुर तालाब के सामने 1 लाख पेड़ लगाए जाएंगे। कुल मिलाकर साढ़े 22 लाख पेड़ लगाने की लिस्टिंग इंदौर जिले के अंदर हमने की है और हमें विश्वास है कि हम उससे ज्यादा पेड़ लगाएंगे।
सवाल – क्या चुनौतियां अभी आपके सामने आ रही हैं?
जवाब – पेड़ लगाने में सबसे बड़ी चुनौती गड्ढे करना होता है। गड्ढे करना, फिर उस स्थान पर पानी की व्यवस्था करना। पेड़ तो लग जाते हैं, लेकिन वहां पानी नहीं होता तो वे गर्मी में सूख जाते हैं। इसलिए हम इस बात की गारंटी ले रहे हैं कि जहां पेड़ लगाए जाएं, वहां पानी की व्यवस्था जरूर हो। उसके लिए सरकार को अगर पैसे लगाने पड़ें तो हम वह भी लगाएंगे। इसके साथ ही अर्बन क्षेत्र के जितने भी बगीचे हैं, वहां हम 25% डेंस फॉरेस्ट लगाएंगे। क्योंकि हर कॉलोनी के अंदर एक ऑक्सीजन जोन होना चाहिए। अभी क्या होता है कि बगीचों में पक्की बाउंड्री वॉल बन जाती है। वहां नीचे घास होती है, छोटे-छोटे पेड़ लगा दिए जाते हैं। बगीचे में एक ट्रैकिंग एरिया बना दिया जाता है, बाकी वहां कोई हरियाली नहीं होती, जिससे बगीचे में ऑक्सीजन लेवल बढ़े।
सवाल – आपको 21 लाख पेड़ लगाने का विचार कैसे आया? पिछले साल आपने 51 लाख लगाए थे।
जवाब – देखिए, मेरा बस चले तो 51 लाख पेड़ फिर से लगाऊं। लेकिन अब यहां स्थान नहीं बचा है। शहर के अंदर भी स्थान नहीं है और ग्रामीण क्षेत्र में भी सरकारी जमीन नहीं है। पिछले दिनों एक सरकार आई थी, मैं नाम नहीं लूंगा। उन्होंने पट्टे बांटकर सारी सरकारी जमीन खत्म कर दी। सरकारी जमीन बची नहीं और प्राइवेट जमीन इतनी महंगी हो गई है कि इंदौर के आसपास कोई जमीन देना नहीं चाहता। यह बात सही है कि शहर के अंदर हरियाली करना अब बहुत मुश्किल है, लेकिन हम सरकारी जमीन ढूंढ-ढूंढकर वहां पेड़ लगा रहे हैं।

सवाल – जल संग्रहण के लिए किस तरह का प्लान है?
जवाब – पेड़ शहर को स्वस्थ रखने और पानी के संरक्षण के लिए जरूरी हैं। हमने इस बार स्लोगन दिया है, “पेड़ लगाओ, पानी बचाओ”। छत के पानी को जमीन के अंदर उतारो। 51 हजार मकानों में हम लोगों से आग्रह करेंगे कि वे जल संवर्धन का पूरा यंत्र लगाएं। इसके लिए हमने नगर निगम से आग्रह किया था कि प्रॉपर्टी टैक्स में छूट दी जाए। उन्होंने 10% की छूट दी है। इसके साथ ही हम लोगों को फिल्टर फ्री दे रहे हैं। 10 से 15 हजार रुपये में 15 बाय 30 की छत पर आराम से जल संग्रहण प्रणाली बन सकती है। मुझे उम्मीद है कि लोग भविष्य को ध्यान में रखते हुए इंदौर में जल संग्रहण भी करेंगे और पेड़ भी लगाएंगे।
सवाल – इंदौर में इस बार जल संकट देखने को मिला था। काफी विकट समस्या थी। इससे कैसे निपटा जाएगा?
जवाब – देखिए, तीन साल बाद नर्मदा जी आएंगी। लेकिन अभी आपको बरसात के पानी को जमीन के अंदर उतारना होगा, जिससे जमीन के अंदर ज्यादा से ज्यादा पानी जाएगा। इस बार 80% हमारे बोरवेल सूख गए थे। अगर हमने ठीक तरीके से जल संग्रहण कर लिया, तो वे नहीं सूखेंगे। अगर वे नहीं सूखे तो आपकी समस्या इतनी बड़ी नहीं होगी। इस बार समस्या ने विकराल रूप इसलिए धारण किया, क्योंकि 80% बोरवेल हमारी लापरवाही के कारण सूख गए थे।
सवाल – जीतू पटवारी के भाई नाना पटवारी का नाम ड्रग्स केस में आया है?
जवाब – देखिए, इस पर ज्यादा बात करना मुझे अच्छा नहीं लगता। लेकिन अब उन्होंने स्वीकार ही कर लिया है कि मैं ड्रग्स लेता था और अब नहीं लेता हूं। पुरानी गलती के लिए वे पश्चाताप कर रहे हैं।

सवाल – दिग्विजय सिंह पैदल यात्रा कर रहे हैं, इसे किस तरह से देखते हैं?
जवाब – 80 वर्ष की उम्र में यदि दिग्विजय सिंह धार्मिक यात्रा कर रहे हैं, तो हमें उन्हें शुभकामनाएं देनी चाहिए। वे आज भी इतने इंटेलिजेंट और ब्रिलियंट नेता हैं कि कार और हवाई जहाज में घूमने वाले तथा साइकिल पर रील बनाने वाले कांग्रेस के युवा नेताओं को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए कि 80 साल का ‘नौजवान’ आज भी पैदल चलने को तैयार है।