जीतू पटवारी हार स्वीकारने की तैयारी में, उनके बयान हताशा दर्शाते हैं: बीजेपी
भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष Jitu Patwari के हालिया बयान पर तीखा पलटवार करते हुए कहा है कि उनके दावे हताशा और निराशा को दर्शाते हैं।
भाजपा प्रवक्ता Ajay Singh Yadav ने कहा कि जीतू पटवारी के बयानों से साफ संकेत मिलता है कि कांग्रेस को राज्यसभा चुनाव में अपनी हार का आभास हो चुका है।
‘दावों का प्रतिशत लगातार घटता गया’
अजय सिंह यादव ने कहा कि जो जीतू पटवारी पहले 5 लाख प्रतिशत जीत का दावा कर रहे थे, उसके बाद 500 प्रतिशत जीत की बात करने लगे और अब 100 प्रतिशत जीत का दावा कर रहे हैं। भाजपा प्रवक्ता के अनुसार यह बदलाव कांग्रेस की घटती उम्मीदों और बढ़ती चिंता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक बयानबाजी में लगातार बदलते दावे इस बात का संकेत हैं कि कांग्रेस नेतृत्व चुनावी परिणामों को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है।
’18 जून से पहले ही हार स्वीकारने की तैयारी’
भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि कांग्रेस राज्यसभा चुनाव के परिणाम आने से पहले ही हार स्वीकारने की मानसिक तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि 18 जून को होने वाले मतदान से पहले कांग्रेस नेताओं के बयान उनकी बेचैनी को उजागर कर रहे हैं।
अजय सिंह यादव ने कहा कि भाजपा अपने सभी उम्मीदवारों की जीत को लेकर आश्वस्त है और पार्टी का संगठन तथा जनप्रतिनिधि पूरी मजबूती के साथ एकजुट हैं।
कांग्रेस पर भ्रष्टाचार को लेकर साधा निशाना
भाजपा ने कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर भी हमला बोला। अजय सिंह यादव ने कहा कि जिस पार्टी पर दशकों तक भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं, वह आज भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बयानबाजी कर रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को पहले अपने राजनीतिक इतिहास और शासनकाल के दौरान लगे आरोपों पर जवाब देना चाहिए, उसके बाद अन्य दलों पर टिप्पणी करनी चाहिए।
राज्यसभा चुनाव को लेकर बढ़ी सियासी सरगर्मी
मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने-अपने उम्मीदवारों की जीत का दावा कर रही हैं, जबकि विभिन्न दलों के नेताओं के बयानों से प्रदेश की राजनीति में हलचल बनी हुई है।
राज्यसभा चुनाव के मद्देनजर दोनों प्रमुख दल अपने विधायकों के संपर्क में हैं और राजनीतिक रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। 18 जून को होने वाले मतदान और उसके बाद आने वाले परिणामों पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।
