नई श्रम संहिताओं पर सियासत तेज, खरगे ने सरकार पर लगाया मजदूर-विरोधी नीतियों का आरोप

केंद्र सरकार द्वारा नई श्रम संहिताओं को अधिसूचित किए जाने के बाद देश की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने नई श्रम संहिताओं को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि इन प्रावधानों से श्रमिकों के अधिकार कमजोर होंगे और नौकरी की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
सोमवार को जारी अपने बयान में खरगे ने कहा कि सरकार ने विधानसभा चुनावों के बाद राजपत्र अधिसूचनाओं के जरिए चार नई श्रम संहिताओं को लागू किया है, जिससे श्रमिक वर्ग की चिंताएं बढ़ गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नए प्रावधानों से “हायर एंड फायर” की नीति को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे करोड़ों कामगारों के रोजगार पर असर पड़ने की आशंका है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने विशेष रूप से वेतन संहिता 2019 पर सवाल उठाते हुए कहा कि मूल वेतन को कुल वेतन का 50 प्रतिशत अनिवार्य करने से कर्मचारियों के हाथ में आने वाली राशि कम हो सकती है। उनका कहना है कि इससे भविष्य निधि (पीएफ) और अन्य कटौतियों में वृद्धि होने की संभावना है, जिससे कर्मचारियों की मासिक आय प्रभावित हो सकती है।
वहीं, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशा संहिता 2020 को लेकर कांग्रेस ने चिंता जताई कि सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को आपराधिक दायरे से बाहर करने से श्रमिकों की सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। खरगे का कहना है कि यदि उद्योगों में सुरक्षा मानकों का पालन सख्ती से नहीं होगा तो श्रमिकों के हितों को नुकसान पहुंच सकता है।
सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार को घेरा। खरगे ने कहा कि गिग और प्लेटफॉर्म आधारित कामगारों के लिए स्पष्ट सामाजिक सुरक्षा मॉडल अभी तक सामने नहीं आया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ऑनलाइन डिलीवरी और ऐप आधारित सेवाओं से जुड़े लाखों श्रमिकों के लिए बीमा, पेंशन या फंडिंग व्यवस्था स्पष्ट नहीं है। कांग्रेस का दावा है कि असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों के लिए प्रस्तावित लाभ अभी केवल कागजी स्तर पर नजर आते हैं।
इसके अलावा औद्योगिक संबंध संहिता 2020 के तहत हड़ताल से पहले नोटिस अवधि बढ़ाने और 300 कर्मचारियों तक की इकाइयों को बिना सरकारी अनुमति छंटनी की छूट दिए जाने पर भी विपक्ष ने आपत्ति जताई है। खरगे ने कहा कि पहले यह सीमा 100 कर्मचारियों वाली इकाइयों पर लागू थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 300 किए जाने से बड़ी संख्या में कर्मचारियों की नौकरी असुरक्षित हो सकती है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि, ग्रामीण रोजगार योजनाओं के विस्तार, असंगठित श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा और ठेका प्रथा पर नियंत्रण जैसे मुद्दों के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि श्रम सुधारों को लागू करते समय श्रमिक संगठनों और संबंधित पक्षों से व्यापक संवाद सुनिश्चित किया जाए, ताकि कामगारों के हितों की रक्षा हो सके।





