हैदराबाद में क्यूनेट रैकेट का भंडाफोड़, 32 गिरफ्तार; करोड़ों की ठगी का खुलासा

हैदराबाद पुलिस ने करोड़ों रुपये के क्यूनेट (QNet) से जुड़े धोखाधड़ी और अवैध मनी सर्कुलेशन रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए 11 महिलाओं सहित कुल 32 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई से देशभर में फैले एक बड़े एमएलएम नेटवर्क का खुलासा हुआ है।
पुलिस आयुक्त वी.सी. सज्जनार ने बताया कि तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में करीब 30 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई, जिसके तहत चार अलग-अलग मामलों में ये गिरफ्तारियां हुईं। गिरफ्तार आरोपितों में ग्रुप लीडर, मोटिवेटर, स्वतंत्र प्रतिनिधि और लोन एजेंट शामिल हैं।
जांच में सामने आया कि यह रैकेट विहान डायरेक्ट सेलिंग प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से संचालित हो रहा था, जो हांगकांग स्थित क्यूआई ग्रुप की फ्रेंचाइजी के रूप में भारत में क्यूनेट ब्रांड के तहत काम कर रही थी। इस पूरे ऑपरेशन के लिए पुलिस ने 30 विशेष टीमों का गठन किया था।
पुलिस के अनुसार, आरोपी सोशल मीडिया के जरिए लोगों को आकर्षित करते थे और ई-कॉमर्स बिजनेस में निवेश के नाम पर भारी मुनाफे का झांसा देते थे। खासकर आईटी प्रोफेशनल्स, बेरोजगार युवा, गृहिणियां और छोटे व्यवसायियों को निशाना बनाया जाता था।
रुचि दिखाने वाले लोगों को 19 से 22 प्रतिशत ब्याज दर पर फिनटेक प्लेटफॉर्म के जरिए पर्सनल लोन लेने के लिए प्रेरित किया जाता था। इसके बाद उन्हें हैदराबाद के हाईटेक सिटी स्थित होटलों और कैफे में बुलाकर निवेश योजनाएं समझाई जाती थीं, लेकिन कंपनी की असली एमएलएम संरचना छिपाई जाती थी।
आरोपित 5 से 10 लाख रुपये के निवेश पर दो साल में 3 से 4 करोड़ रुपये तक का मुनाफा होने का दावा करते थे। हालांकि, असल में निवेशकों को नकद रिटर्न देने के बजाय आयुर्वेदिक उत्पाद, बिस्किट और शहद जैसे सामान ‘गिफ्ट’ के रूप में दिए जाते थे। कई मामलों में निवेशकों की जानकारी के बिना उनकी राशि को उत्पाद खरीद में समायोजित कर लिया जाता था।
पुलिस के मुताबिक, तेलंगाना में अब तक 68 से अधिक पीड़ितों की पहचान हो चुकी है, जिनमें 22 हैदराबाद के हैं। शुरुआती जांच में 11 पीड़ितों के करीब 75 लाख रुपये के नुकसान की पुष्टि हुई है।
एक दर्दनाक मामले में सिद्धिपेट के एक व्यक्ति ने 5 लाख रुपये गंवाने के बाद आत्महत्या कर ली थी। उसके सुसाइड नोट में कंपनी के भ्रामक दावों का जिक्र किया गया था।
पुलिस ने बताया कि जिन लोगों के पास निवेश के लिए पैसे नहीं थे, उन्हें नेटवर्क के जरिए लोन दिलवाया जाता था और बाद में भारी रकम वसूली जाती थी। मामले में अन्य फरार आरोपितों की तलाश जारी है और जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।






