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उज्जैन में पंचांग देखकर मनाया स्वतंत्रता दिवस: गणेश मंदिर में 4 दिन पहले फहराया तिरंगा; 1947 से चली आ रही परंपरा

उज्जैन। देशभर में स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को मनाया जाएगा, लेकिन उज्जैन के प्रसिद्ध बड़ा गणेश मंदिर में मंगलवार को ही स्वतंत्रता दिवस का आयोजन किया गया। यहां स्वतंत्रता दिवस अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख के बजाय हिंदू पंचांग के अनुसार मनाने की 79 साल पुरानी परंपरा है।

इस बार श्रावण कृष्ण चतुर्दशी 11 अगस्त को होने के कारण मंदिर में चार दिन पहले ही तिरंगा फहराया गया।

तिरंगा यात्रा के साथ शुरू हुआ आयोजन
मंदिर में सुबह से ही विशेष सजावट की गई। परिसर को तिरंगे से सजाया गया। परिवार के सदस्यों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। मंदिर के पास स्थित पुराने पारिवारिक आवास से तिरंगा यात्रा निकाली गई, जो बड़ा गणेश मंदिर पहुंची।

यहां ध्वज पूजन और गणेश पूजन के बाद महाआरती हुई। देशभक्ति के नारों और गीतों के बीच मंदिर के शिखर पर तिरंगा फहराया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

1947 के मुहूर्त से जुड़ी है परंपरा
व्यास परिवार का कहना है की देश की आजादी के समय स्वतंत्रता प्राप्ति के शुभ मुहूर्त को लेकर उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित सूर्य नारायण व्यास से चर्चा की गई थी। तत्कालीन नेतृत्व की ओर से उनसे पूछा गया था कि देश को स्वतंत्रता किस समय प्राप्त करनी चाहिए।

पंडित व्यास ने पंचांग और ज्योतिषीय गणना के आधार पर श्रावण कृष्ण चतुर्दशी को शुभ तिथि बताया था। वर्ष 1947 में यही तिथि 15 अगस्त को पड़ी थी। इसी के बाद बड़ा गणेश मंदिर में हर साल इसी तिथि पर स्वतंत्रता दिवस मनाने की परंपरा शुरू हुई।

शुरुआत में आयोजन था पारिवारिक
पंडित अक्षत व्यास ने कहा- आजादी के समय शुरू हुई यह परंपरा पहले सीमित और पारिवारिक स्तर पर होती थी। परिवार के सदस्य मंदिर में एकत्र होकर ध्वज पूजन और धार्मिक अनुष्ठान करते थे। समय के साथ आयोजन का स्वरूप बढ़ता गया और बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी इसमें शामिल होते हैं।

परिवार ने बताया- आजादी के मुहूर्त को लेकर पंडित सूर्य नारायण व्यास और डॉ. राजेंद्र प्रसाद के बीच चर्चा हुई थी। डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने पंडित व्यास के प्रति आभार व्यक्त करते हुए पत्र लिखा था।

बड़ा गणेश मंदिर व्यास परिवार का पारिवारिक मंदिर
महाकाल मंदिर के पास स्थित बड़ा गणेश मंदिर उज्जैन के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। व्यास परिवार के अनुसार, यह उनका पारिवारिक मंदिर है। यहां परिवार की कुलदेवी के साथ पूर्वजों द्वारा स्थापित देवी-देवताओं की भी पूजा की जाती है।

119 साल पुराने मंदिर का गणतंत्र से भी जुड़ा है इतिहास
बड़ा गणेश मंदिर की स्थापना वर्ष 1907 में हुई थी। उस समय पुणे में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की ओर से आयोजित ज्योतिष सम्मेलन में उज्जैन के पंडित नारायण जी व्यास भी शामिल हुए थे।

परिवार ने बताया की- पंडित नारायण जी व्यास ने भगवान गणेश को गणतंत्र के आराध्य देव बताते हुए देश में बड़े गणतंत्र की स्थापना की बात कही थी। इसके बाद उज्जैन लौटकर उन्होंने यहां बड़े गणेश की प्रतिमा स्थापित कराई।

सरकारी आयोजन नहीं, परिवार की परंपरा
मंदिर में स्वतंत्रता दिवस का यह आयोजन किसी सरकारी विभाग या प्रशासन की ओर से नहीं किया जाता। इसकी पूरी व्यवस्था परिवार के सदस्य, पुजारी और सेवक मिलकर करते हैं। हालांकि समय के साथ स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की भागीदारी बढ़ी है।

धर्म और राष्ट्रभक्ति का संगम
बड़ा गणेश मंदिर में होने वाला यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ राष्ट्रभक्ति को भी जोड़ता है। एक ओर गणेश पूजन और महाआरती होती है, तो दूसरी ओर मंदिर के शिखर पर तिरंगा फहराकर देश की आजादी को नमन किया जाता है।  इसका उद्देश्य आजादी के ऐतिहासिक क्षण को याद रखना और नई पीढ़ी को उसके महत्व से जोड़ना है।

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