15 साल बाद रोहिणी नक्षत्र में जन्म लेंगे श्रीकृष्ण: जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त; इन बातों का रखें विशेष ध्यान

भारत। पूरे देश में आज रात 12 बजे श्री कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा। 15 साल बाद भगवान रोहिणी नक्षत्र में जन्म लेंगे। अष्टमी तिथि रोहिणी नक्षत्र वृषभ राशि के चंद्रमा में कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा।
इस मुहूर्त में करें पूजा
जन्माष्टमी पर इस बार ऐसा संयोग बन रहा है, जैसा भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय होने की मान्यता है। अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात 2:25 बजे से शुरू होकर 5 सितंबर की रात 12:13 बजे तक रहेगी। 4 सितंबर को निशीथ काल रात 11:57 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा, इसी दौरान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। श्रद्धालु व्रत रखकर अगले दिन पारण करते हैं, जिसका समय 6 सितंबर की सुबह 6 बजे के बाद किया जाएगा।
इस तरह करें पूजा
शाम को लड्डू गोपाल की संध्या आरती करने के बाद उन्हें वस्त्र से ढक दें। जन्म के समय वस्त्र हटकार भगवान का दर्शन करें। इसके बाद भगवान का पंचामृत से अभिषेक करें। उन्हें सुंदर वस्त्र पहनाएं, शृंगार करें। इसके बाद भगवान को पुष्प, तुलसी और धूप अर्पित करें। फिर भगवान की आरती करें। उन्हें मक्खन मिश्री, पंचामृत और पंजीरी का भोग लगाए। मधुराष्टकम का पाठ भी जरूर करें।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
लड्डू गोपाल की पूजा करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। सबसे जरूरी है कि लड्डूगोपाल के वस्त्रों का चयन सावधानी से करें। ज्यादा बड़े-छोटे और चुभने वाले वस्त्र न पहनाए। सेफ़्टी पिन का इस्तेमाल न करें। लड्डू गोपाल के पास बांसुरी जरूर रखें। भगवान के भोग में स्वच्छता और पवित्रता का ध्यान भी रखें। उन्हें ज्यादा तीखा भोग न चढ़ाएं।