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वंतारा से कोल्हापुर लौटीं महादेवी: 13 महीने बाद घर पहुंचीं हथिनी; परिवार की तरह स्वागत करने उमड़े हजारों लोग

कोल्हापुर। करीब 13 महीने बाद हथिनी माधुरी यानी महादेवी शनिवार रात कोल्हापुर लौट आईं। नांदणी जैन मठ और आसपास के लोगों का उनसे वर्षों पुराना जुड़ाव है। स्थानीय लोग उन्हें सिर्फ एक हथिनी नहीं, बल्कि अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं। यही वजह रही कि उनकी वापसी की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में लोग रात में ही नांदणी पहुंच गए। महादेवी के मठ पहुंचते ही लोगों ने फूल बरसाकर स्वागत किया और पुजारियों ने तिलक लगाकर पूजा की।

महादेवी को जुलाई 2025 में इलाज के लिए गुजरात के जामनगर स्थित वंतारा भेजा गया था। उनके जाने के बाद स्थानीय लोगों ने विरोध जताते हुए वापसी की मांग की थी। 409 दिन यानी करीब 13 महीने इलाज और देखभाल के बाद उन्हें स्वस्थ घोषित किया गया और अब उनकी घर वापसी हो गई है।

महादेवी के नांदणी पहुंचने पर उन्हें लाने वाले ट्रक की भी पूजा की गई। देर रात करीब 2 बजे पहुंचने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग उनकी एक झलक पाने के लिए मौजूद रहे।

गुरुवार शाम निकली, शनिवार रात पहुंची
वनतारा से महादेवी को गुरुवार शाम करीब 5 बजे रवाना किया गया था। करीब 1,160 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद वह शनिवार रात लगभग 2 बजे नांदणी पहुंची।

महादेवी के पहुंचने की जानकारी मिलते ही मठ के आसपास लोगों की भीड़ जुट गई। हालांकि, लंबे सफर और उसकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए स्वागत कार्यक्रम को ज्यादा लंबा नहीं रखा गया। उसे भीड़ से दूर सीधे उसके लिए तैयार किए गए शेल्टर में ले जाया गया।

1992 में 4 साल की उम्र में लाई गई थी
महादेवी को 1992 में नांदणी लाया गया था। उस समय वह करीब 4 साल की थी। इसके बाद उसने लगभग 32 साल नांदणी में बिताए। नांदणी मठ में लंबे समय से हाथी पालने की परंपरा रही है। महादेवी को वनतारा भेजे जाने के बाद स्थानीय स्तर पर उसकी वापसी को लेकर लगातार आवाज उठती रही।

वापसी के बाद भी रहेगी स्वास्थ्य पर नजर
महादेवी की कोल्हापुर वापसी के साथ उसकी देखभाल को लेकर कई शर्तें भी तय की गई हैं। उसकी सेहत की नियमित निगरानी की जाएगी।

मुख्य शर्तें:

  • महादेवी को किसी जुलूस या सार्वजनिक आयोजन में शामिल नहीं किया जाएगा।
  • उसकी 24 घंटे निगरानी और देखभाल होगी।
  • हर 15 दिन में मेडिकल जांच कराई जाएगी।
  • वनतारा की मेडिकल टीम भी हर 15 दिन में नांदणी आकर उसकी जांच करेगी।
  • जांच की रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को दी जाएगी।

वनतारा की ओर से बताया गया है कि इलाज के बाद महादेवी की हालत स्थिर है, लेकिन उसकी पुरानी स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए लगातार निगरानी जरूरी है।

महादेवी के लिए तैयार किया गया खास शेल्टर
मठ में महादेवी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अलग शेल्टर तैयार किया गया है। यहां हवा और पर्याप्त जगह की व्यवस्था की गई है। उसके पैरों को आराम देने के लिए रबर मैट लगाए गए हैं। गर्मी और मक्खियों से बचाव के लिए बड़े पंखे, फॉगिंग सिस्टम और पानी के फव्वारे लगाए गए हैं।

शेल्टर के पास पानी का तालाब बनाया गया है। इसके अलावा हाइड्रोथेरेपी के लिए स्विमिंग टैंक की भी व्यवस्था की गई है। महादेवी के भोजन के लिए अलग किचन बनाया गया है। यहां उसकी डाइट के अनुसार पका हुआ अनाज, दाल, फल और अन्य खाद्य सामग्री तैयार की जाएगी। प्राथमिक इलाज की सुविधा और महावत के स्थायी रहने की व्यवस्था भी की गई है।

माधुरी से महादेवी कैसे बनीं?
हथिनी का नाम माधुरी है और इसी नाम से वह नांदणी मठ में जानी जाती रही हैं। माधुरी को 1992 में करीब 3-4 साल की उम्र में कर्नाटक से नांदणी मठ लाया गया था। इसके बाद करीब तीन दशक तक वह मठ और आसपास के लोगों के बीच परिवार के सदस्य जैसी बन गईं। कोल्हापुर में श्रद्धालु और स्थानीय लोग माधुरी को प्यार और श्रद्धा से ‘महादेवी’ कहने लगे। इसी वजह से उनके लिए दोनों नाम इस्तेमाल होते हैं—‘माधुरी’ और ‘महादेवी’।

 

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