समाज में विभाजन को समाप्त करने के लिए संवाद की पहल करेंगे आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर.एस.एस.) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि समाज में मौजूद विभाजन और मतभेदों को समाप्त करने के लिए संघ संवाद और जनसंपर्क की नई पहल करेगा। बेंगलुरु में आयोजित ‘संघ की 100 वर्ष की यात्रा – नए क्षितिज’ विषयक व्याख्यान श्रृंखला में बोलते हुए श्री भागवत ने कहा कि भारत की सामाजिक एकता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है, और अब समय आ गया है कि हम मिलकर उस एकता को फिर से मजबूत करें।
उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हिंदू और मुसलमान दोनों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष किया था। अंग्रेजों ने इस एकता को अपने शासन के लिए खतरा समझते हुए समाज में ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति अपनाई। श्री भागवत के अनुसार, आज आवश्यकता है कि समाज में भेदभाव और अविश्वास की दीवारों को गिराकर सामाजिक समरसता की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
उन्होंने बताया कि आरएसएस जल्द ही जनसंपर्क और सद्भावना कार्यक्रमों की एक शृंखला शुरू करेगा, जिसके तहत ब्लॉक स्तर पर जातिगत नेताओं और धार्मिक समुदायों के प्रमुखों से संवाद किया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य सामाजिक एकता को सशक्त बनाना और समुदायों के बीच मौजूद संघर्षों का समाधान ढूंढना है।
मोहन भागवत ने नागरिक समाज से भी आह्वान किया कि वे सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता के लिए अपनी क्षमता के अनुसार योगदान दें। उन्होंने कहा कि देश का विकास तभी संभव है जब सभी समुदाय एक-दूसरे के साथ सहयोग और सम्मान की भावना से आगे बढ़ें।






