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मानवाधिकार परिषद के उच्च स्तरीय सत्र को विदेश मंत्री ने किया संबोधित, कहा-भारत ने टकराव के बजाय संवाद को दी प्राथमिकता

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के उच्च स्तरीय सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने हमेशा टकराव के बजाय संवाद, विभाजन के बजाय सहमति और संकीर्ण हितों के बजाय मानव-केंद्रित विकास को प्राथमिकता दी है।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि संघर्ष, ध्रुवीकरण और अनिश्चितता से घिरी दुनिया में भारत साझा आधार खोजने और उसे मजबूत करने का प्रयास करता रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का दृष्टिकोण इस समझ पर आधारित है कि किसी भी क्षेत्र की असुरक्षा या किसी भी समूह को हाशिए पर धकेलना अंततः सभी के अधिकारों और कल्याण को कमजोर करता है।

आतंकवाद पर सख्त रुख

विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के खिलाफ दृढ़ और अडिग है। उन्होंने आतंकवाद को मानवाधिकारों का सबसे जघन्य उल्लंघन बताते हुए इसके खिलाफ सामूहिक वैश्विक संकल्प का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि आतंकवाद न केवल निर्दोष लोगों के जीवन को प्रभावित करता है, बल्कि विकास, शांति और स्थिरता की नींव को भी कमजोर करता है।

मानव क्षमताओं में निवेश

डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत अभूतपूर्व पैमाने पर मानव क्षमताओं के विकास में निवेश कर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (DPI) का उल्लेख किया, जिसने करोड़ों लोगों को पारदर्शिता और न्यूनतम रिसाव के साथ कल्याणकारी लाभ, वित्तीय सेवाओं और सरकारी योजनाओं तक पहुंच प्रदान की है।

उन्होंने बताया कि तकनीक के माध्यम से सशक्तिकरण भारत की विकास रणनीति का प्रमुख आधार है और इसका उद्देश्य समावेशी तथा सतत विकास सुनिश्चित करना है।

वैश्विक सहयोग पर जोर

विदेश मंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि आज की वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग, संवाद और पारस्परिक सम्मान आवश्यक हैं। भारत इसी सोच के साथ वैश्विक मंचों पर सक्रिय भूमिका निभा रहा है और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

भारत का यह रुख स्पष्ट करता है कि उसकी विदेश नीति संवाद, सहमति और मानव कल्याण पर आधारित है, जो वैश्विक शांति और स्थिरता की दिशा में एक सकारात्मक संदेश देता है।

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