मार्च में थोक महंगाई दर बढ़कर 3.88% पर पहुंची, ईंधन और विनिर्माण वस्तुओं ने बढ़ाया दबाव

देश में थोक महंगाई (WPI) लगातार पांचवें महीने बढ़ते हुए मार्च 2026 में 3.88 फीसदी पर पहुंच गई है। इससे पहले फरवरी में यह 2.13 फीसदी और मार्च 2025 में 2.25 फीसदी दर्ज की गई थी।
किन कारणों से बढ़ी महंगाई?
Ministry of Commerce and Industry के अनुसार, महंगाई बढ़ने की मुख्य वजहें रहीं:
- ईंधन और बिजली की कीमतों में तेजी
- कच्चे तेल और नेचुरल गैस के दाम में उछाल
- विनिर्मित उत्पादों की लागत में वृद्धि
ईंधन और ऊर्जा का बड़ा असर
मार्च में ईंधन एवं बिजली श्रेणी में महंगाई 1.05% रही, जबकि फरवरी में इसमें गिरावट दर्ज की गई थी।
- कच्चे तेल की महंगाई दर बढ़कर 51.57% हो गई
यह दिखाता है कि वैश्विक बाजार की हलचल का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ रहा है।
विनिर्माण क्षेत्र में भी दबाव
विनिर्मित उत्पादों की महंगाई दर फरवरी के 2.92% से बढ़कर मार्च में 3.39% हो गई, जो औद्योगिक लागत बढ़ने का संकेत है।
राहत: खाद्य महंगाई में गिरावट
हालांकि, कुछ राहत खाद्य क्षेत्र से मिली:
- खाद्य वस्तुओं की महंगाई घटकर 1.90%
- सब्जियों की महंगाई घटकर 1.45%
खुदरा महंगाई भी बढ़ी
इससे पहले Reserve Bank of India के लिए अहम खुदरा महंगाई (CPI) भी मार्च में बढ़कर 3.4% हो गई थी।
RBI की नजर महंगाई पर
आरबीआई मौद्रिक नीति तय करते समय मुख्य रूप से खुदरा महंगाई को आधार मानता है। हाल ही में केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों को स्थिर रखा है, लेकिन महंगाई के बढ़ते संकेत आगे नीति पर असर डाल सकते हैं।
कुल मिलाकर, ईंधन और वैश्विक परिस्थितियों के कारण बढ़ती लागत ने थोक महंगाई को ऊपर धकेला है, हालांकि खाद्य कीमतों में नरमी ने कुछ संतुलन बनाए रखा है।






