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भोजशाला पहुंचे विहिप नेता हुकुमचंद सावला, बोले- पत्थरों के चिन्ह मंदिर होने का प्रमाण

भोजशाला पहुंचे विहिप नेता हुकुमचंद सावला, बोले- पत्थरों के चिन्ह मंदिर होने का प्रमाण

Dhar की ऐतिहासिक भोजशाला में शनिवार को विश्व हिंदू परिषद के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष Hukumchand Savla पहुंचे। उन्होंने भोजशाला परिसर में दर्शन और पूजा-अर्चना की तथा इसे आस्था, शिक्षा और संस्कृति की प्राचीन परंपरा का प्रतीक बताया।

सावला ने कहा कि भोजशाला केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि प्राचीन काल में शिक्षा और संस्कृति का प्रमुख केंद्र रही है। उनके अनुसार, यह मूल रूप से मां सरस्वती का दिव्य मंदिर था, जहां विभिन्न प्रकार की विधाओं की शिक्षा दी जाती थी।

उन्होंने दावा किया कि भोजशाला के पत्थरों के चिन्ह और संरचना स्वयं मंदिर स्वरूप होने का प्रमाण प्रस्तुत करते हैं और इतिहास इस स्थल की वास्तविक पहचान को दर्शाता है।

मां वाग्देवी के भव्य मंदिर निर्माण की कही बात

भोजशाला परिसर का निरीक्षण करने के बाद हुकुमचंद सावला ने कहा कि जनभावनाओं के अनुरूप भविष्य में यहां मां सरस्वती वाग्देवी का भव्य मंदिर बनाया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले के बाद भोजशाला को लेकर गतिविधियां बढ़ी हैं। शनिवार को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भोजशाला पहुंचे और पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं की लगातार आवाजाही को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।

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