वाराणसी: संतों ने मां श्रृंगार गौरी की पूजा कर रामकथा का किया शुभारंभ, ज्ञानवापी परिसर में गूंजा हर-हर महादेव

उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी (काशी) में शनिवार को संतों ने ज्ञानवापी परिसर स्थित मां श्रृंगार गौरी का विधिवत पूजन करने के बाद नौ दिवसीय नवान्ह पारायण रामकथा का शुभारंभ किया। इस अवसर पर संतों के हर-हर महादेव के उद्घोष से परिसर गुंजायमान रहा।
कथा का आयोजन माघ मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि से शुरू हुआ, जिसमें श्री काशी विश्वनाथ धाम में कथा वाचक संत श्री काशी विश्वनाथ द्वारा रामकथा का श्रवण कराया जाएगा।
🔹 संत समिति का विवरण
अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जीतेन्द्रानंद ने बताया कि काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास कई उतार-चढ़ाव भरा रहा है। इतिहास में यह मंदिर सात बार तोड़ा गया, जिनमें 19 अप्रैल 1669 को औरंगजेब के आदेश से इसका विध्वंस हुआ।
उस समय वैदिक ब्राह्मणों ने सुनिश्चित किया कि मंदिर की परंपरा और स्मृति जीवित रहे। इसी कारण श्रृंगार गौरी के अवशेष को संरक्षित किया गया।
🔹 परंपरा और कानूनी मान्यता
श्रृंगार गौरी का पूजन कर काशी विश्वनाथ को रामकथा सुनाने की परंपरा 1965 तक बिना किसी बाधा के चलती रही।
1965 में नगर निगम के गठन के बाद इस परंपरा को विधिवत कानूनी मान्यता प्राप्त हुई।
माघ मास की षष्ठी तिथि से पूर्णिमा तक यह कथा जारी रहेगी।
🔹 संतों की कामना
मां श्रृंगार गौरी की पूजा कर बाबा विश्वनाथ से यह कामना की गई कि ज्ञानवापी परिसर आतताइयों से मुक्त रहे।
भविष्य में यहाँ भव्य दिव्य बाबा विश्वनाथ का पुनः स्थापना हो और ज्योर्तिलिंग बाबा विश्वेश्वर पुनः स्थापित हों।






