रूस-चीन का बड़ा संदेश: ‘बहुध्रुवीय दुनिया’ बनाने का ऐलान, अमेरिका को चुनौती के संकेत

वैश्विक राजनीति में बड़ा संदेश देते हुए रूस और चीन ने बुधवार को एक ऐतिहासिक संयुक्त घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बीजिंग में हुई बैठक के दौरान ‘बहुध्रुवीय दुनिया’ (Multipolar World) के निर्माण का संकल्प लिया। इसे अमेरिका के वैश्विक वर्चस्व के लिए चुनौतीपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

पुतिन और शी ने किए 20 समझौतों पर हस्ताक्षर

रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों नेताओं ने 20 अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिसके बाद संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया गया। हालांकि बाकी समझौतों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया।

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा, “रूस और चीन अपने द्विपक्षीय सहयोग का विस्तार करेंगे और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिलकर बहुध्रुवीय दुनिया की मजबूत नींव रखने के लिए काम करेंगे।”

वहीं शी जिनपिंग ने रूस-चीन संबंधों को दो बड़ी शक्तियों के बीच सहयोग का आदर्श मॉडल बताया और परोक्ष रूप से अमेरिका पर निशाना साधते हुए ‘एकतरफा और वर्चस्ववादी प्रवृत्तियों’ को लेकर चेतावनी दी।

मध्य पूर्व संकट और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा

बैठक के दौरान मध्य पूर्व में सैन्य संघर्ष रोकने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। शी जिनपिंग ने कहा कि मध्य पूर्व में पूर्ण युद्धविराम बेहद जरूरी है।

दोनों देशों ने रणनीतिक समन्वय बढ़ाने, अच्छे पड़ोसी संबंधों को मजबूत करने और मैत्रीपूर्ण सहयोग को गहरा करने पर सहमति जताई।

G20, WTO और Belt and Road पर साथ काम करेंगे

राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि रूस और चीन G20, विश्व व्यापार संगठन (WTO) और विश्व बैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साझा रुख बनाए रखेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि चीन की ‘बेल्ट एंड रोड पहल’ और रूस की रणनीतिक परियोजनाओं के बीच तालमेल को और मजबूत किया जाएगा।

इस बीच, चीन ने रूसी नागरिकों के लिए वीजा-मुक्त नीति 31 दिसंबर 2027 तक बढ़ाने का भी ऐलान किया।

क्या है ‘बहुध्रुवीय दुनिया’?

बहुध्रुवीय दुनिया (Multipolar World) का अर्थ ऐसी वैश्विक व्यवस्था से है, जहां राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य शक्ति केवल एक देश तक सीमित न होकर कई देशों के बीच बंटी हो।

सोवियत संघ के विघटन के बाद लंबे समय तक अमेरिका अकेली महाशक्ति माना जाता रहा, लेकिन अब चीन, रूस, यूरोपीय देश और अन्य शक्तियां भी वैश्विक राजनीति में अहम भूमिका निभा रही हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह मॉडल किसी एक देश के दबदबे को कम करने, संतुलित वैश्विक व्यवस्था बनाने और छोटे देशों को स्वतंत्र विदेश नीति के अधिक विकल्प देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है।

Share

Similar Posts