रोहिणी नक्षत्र में जन्मेंगे कान्हा: 15 साल बाद बने खास संयोग; उज्जैन के मंदिरों में भव्य आयोजन

उज्जैन। देशभर में 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाएगी। पंडित अक्षत व्यास के अनुसार इस बार 15 साल बाद ऐसा विशेष संयोग बन रहा है, जब रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। मान्यता है कि द्वापर युग में भी श्रीकृष्ण का जन्म इसी नक्षत्र में हुआ था।
पंडित अक्षत व्यास ने बताया कि जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का पावन पर्व है। शास्त्रों के अनुसार भगवान का जन्म मध्यरात्रि में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग में हुआ था। इस बार भी जन्माष्टमी पर यही विशेष संयोग बन रहा है। उन्होंने बताया कि कई बार अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग एक साथ नहीं बनता। रामानंदी संप्रदाय में तिथि से अधिक रोहिणी नक्षत्र को महत्व दिया जाता है।
इस बार संयोग से अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र एक ही दिन हैं। इसलिए वैष्णव और रामानंदी सहित सभी संप्रदाय 4 सितंबर को जन्माष्टमी मनाएंगे। कई वर्षों में जन्माष्टमी की अर्धरात्रि में भाद्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी और वृष राशि के चंद्रमा का संयोग तो बनता है, लेकिन रोहिणी नक्षत्र साथ नहीं आता। इस बार ये सभी प्रमुख ज्योतिषीय संयोग एक साथ बन रहे हैं। मान्यता है कि रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि में श्रीकृष्ण पूजन करने से विशेष फल प्राप्त होता है।

महाकाल की नगरी मे विशेष सजावट
उज्जैन में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर मंदिरों में विशेष तैयारियां की जा रही हैं। भरतपुरी स्थित इस्कॉन मंदिर में सुबह से भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। साथ ही यहां भगवान का जन्मउत्सव के समय लेज़र लाइट से स्वागत होगा। राधा-मोहन का पूजन-अभिषेक कर नए वस्त्र, आभूषण और पुष्पमालाओं से आकर्षक श्रृंगार किया जाएगा और भक्तों को प्रसाद बांटा जाएगा। सिंधिया ट्रस्ट के श्री द्वारकाधीश गोपाल मंदिर में पंचामृत अभिषेक के बाद दर्शन शुरू होंगे। यहां ढोली बुआ का कीर्तन भी होगा। वहीं सांदीपनि आश्रम में विशेष पूजन और आरती होगी। श्रद्धालु सुबह 7 बजे से रात 11:30 बजे तक दर्शन कर सकेंगे। रात 12 बजे प्रमुख मंदिरों में विशेष आरती होगी।