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रानापुर के भूतखेड़ी और सालरपाड़ा में खनिज खदान के सर्वे और नीलामी प्रक्रिया के खिलाफ ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

झाबुआ जिले की रानापुर तहसील के अंतर्गत आने वाले आदिवासी बहुल ग्राम पंचायत भूतखेड़ी और सालरपाड़ा के ग्रामीण खनिज धातु खदान के सर्वे और नीलामी प्रक्रिया का विरोध करने के लिए बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट को ज्ञापन सौंपकर इस पूरी प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की।

ग्रामीणों ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि उनका क्षेत्र भारतीय संविधान की पांचवीं अनुसूची के अनुच्छेद 244/1 के अंतर्गत अनुसूचित क्षेत्र में आता है। इसके साथ ही पेसा एक्ट 1996 और मध्य प्रदेश पेसा एक्ट 2022 के स्पष्ट प्रावधानों के अनुसार, ग्राम सभा की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी नागरिक, कंपनी, या राज्य व केंद्र सरकार को जल, जंगल, जमीन और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने का अधिकार नहीं है।

ग्रामीणों ने जानकारी दी कि वर्ष 2019 में भूतखेड़ी और सालरपाड़ा के लगभग 600 हेक्टेयर क्षेत्र में खनिज पदार्थों और अन्य धातुओं के सर्वे व नीलामी की बात सामने आने पर वर्ष 2024 में एक विशेष ग्राम सभा बुलाई गई थी। इस सभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर यह निर्णय लिया गया था कि बिना अनुमति के क्षेत्र में कोई खनन कार्य नहीं होने दिया जाएगा और ग्रामीण अपनी जमीन किसी भी कंपनी को देने के लिए तैयार नहीं हैं। इस संबंध में 24 सितंबर 2024 को रानापुर में जनसुनवाई के माध्यम से प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा गया था।

हाल ही में वर्ष 2026 में मीडिया और खनिज विभाग के माध्यम से यह जानकारी सामने आई कि सरकार भूतखेड़ी, सालरपाड़ा और आसपास के गांवों में खदान के लिए सर्वे और नीलामी की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है, जिसके बाद से गांवों में चिंता और भय का माहौल है। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों सहित सभी ग्रामीण इस बात को लेकर आशंकित हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि भूतखेड़ी और सालरपाड़ा क्षेत्र में खनिज खदान के लिए चल रही सर्वे और नीलामी की प्रक्रिया को पूरी तरह निरस्त किया जाए, भविष्य में भी इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार के खनन को अनुमति न दी जाए, और खनिज विभाग इस पूरे मामले की लिखित जानकारी पत्र के माध्यम से ग्रामीणों को दे।

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