सोशल मीडिया प्रेम जाल में फंसी 10 नाबालिग लड़कियां बरामद, 25 दिनों में पुलिस की बड़ी कार्रवाई

जिले के आनंदपुर थाना क्षेत्र में सोशल मीडिया प्रेम जाल में फंसकर घर छोड़ने वाली 10 नाबालिग लड़कियां बरामद कर पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। महज 25 दिनों के भीतर सभी को सुरक्षित खोज निकालना पुलिस की त्वरित कार्रवाई का परिणाम माना जा रहा है।
बरामद सभी नाबालिगों को Child Welfare Committee के माध्यम से सरकारी शेल्टर होम भेज दिया गया है।
फेसबुक-इंस्टाग्राम से शुरू हुई ऑनलाइन दोस्ती
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन किशोरियों की पहचान फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर हुई थी। ऑनलाइन बातचीत धीरे-धीरे प्रेम संबंध में बदल गई और इसी ‘प्यार’ के प्रभाव में आकर वे घर छोड़कर अलग-अलग स्थानों पर चली गईं।
आनंदपुर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पिछले 25 दिनों में सभी मामलों को ट्रैक कर सुरक्षित बरामदगी सुनिश्चित की।
परीक्षा से पहले घर छोड़ने का मामला
बरामद लड़कियों में एक 10वीं की परीक्षार्थी भी शामिल है, जो परीक्षा से कुछ दिन पहले ही अपने कथित प्रेमी के साथ घर से चली गई थी। मामले में पुलिस ने आरोपित के एक रिश्तेदार को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसके बाद लड़की को केशपुर बस स्टैंड के पास से सुरक्षित बरामद किया गया।
मानव तस्करी की आशंका भी जताई
एक पीड़ित पिता ने कहा कि उन्होंने बेटी को पढ़ाई के लिए घर से भेजा था, लेकिन वह सोशल मीडिया के प्रभाव में आकर घर छोड़ गई। उन्होंने आशंका जताई कि यदि समय रहते पुलिस कार्रवाई नहीं करती, तो उनकी बेटी किसी बड़ी मुसीबत या मानव तस्करी जैसे अपराध का शिकार हो सकती थी।
प्रशासन की चिंता: बाल विवाह और घर छोड़ने की घटनाएं
जिला प्रशासन का मानना है कि पश्चिम मेदिनीपुर में बाल विवाह और नाबालिगों के घर छोड़ने की घटनाएं अभी भी चिंता का विषय हैं। अधिकारियों के अनुसार, कई मामलों में माता-पिता की जबरदस्ती नहीं होती, बल्कि नाबालिग स्वयं ही घर छोड़कर विवाह कर लेती हैं।
स्कूलों में ‘कन्याश्री क्लब’ और ‘बंधु महल’ जैसे जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, लेकिन सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के सामने ये प्रयास अभी पर्याप्त साबित नहीं हो पा रहे हैं।
अभिभावकों से पुलिस की अपील
पुलिस और प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें, खुला संवाद बनाए रखें और किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत स्थानीय थाने से संपर्क करें, ताकि ऐसी घटनाओं को समय रहते रोका जा सके।
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि ऑनलाइन दोस्ती मामला केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है।






