न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र 62 होगी: सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया आदेश; MP समेत 7 राज्यों में लागू होगा नियम

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की उम्र 60 से बढ़ाकर 62 साल करने का आदेश दिया है।
यह फैसला मध्यप्रदेश समेत सात राज्यों के न्यायिक अधिकारियों पर लागू होगा। कोर्ट ने संबंधित राज्यों को जल्द से जल्द, संभव हो तो दो महीने के भीतर, सेवा नियमों में जरूरी बदलाव करने के निर्देश दिए हैं।
सेवा नियमों में बदलाव होने तक नहीं होंगे रिटायर
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक सेवा नियमों में बदलाव नहीं होता, तब तक 60 साल की उम्र पूरी करने वाले न्यायिक अधिकारियों को रिटायर नहीं किया जाएगा। हालांकि, संबंधित हाई कोर्ट की ओर से अधिकारी को सेवा के लिए उपयुक्त पाया जाना जरूरी होगा।
31 मार्च 2026 या उसके बाद रिटायर हुए अधिकारियों को भी राहत
आदेश का लाभ उन न्यायिक अधिकारियों को भी मिलेगा, जो 31 मार्च 2026 या उसके बाद 60 साल की उम्र पूरी कर रिटायर हो चुके हैं। ऐसे अधिकारी दोबारा सेवा में आने का विकल्प चुन सकेंगे। इसके लिए शर्त होगी कि उन्होंने रिटायरमेंट के बाद कोई दूसरी नौकरी स्वीकार न की हो।
प्रदर्शन का आकलन फिर होगा फैसला
60 साल की उम्र पूरी होने पर संबंधित हाई कोर्ट अधिकारी के कामकाज, योग्यता और प्रदर्शन का आकलन करेगा। इसके बाद ही उनकी सेवा जारी रखने या दोबारा नियुक्त करने पर फैसला लिया जाएगा।
इन 7 राज्यों में लागू होगा आदेश
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यह आदेश मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, महाराष्ट्र, सिक्किम, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के लिए जारी किया है।
न्यायपालिका के खाली पदों में आएगी कमी
कोर्ट ने माना कि अनुभवी न्यायिक अधिकारियों को सेवा में बनाए रखने से न्यायपालिका में खाली पदों की वजह से काम पर पड़ने वाले असर को कम करने में मदद मिलेगी। इससे अदालतों में लंबित मामलों के निपटारे में भी मदद मिलने की उम्मीद है।