पश्चिम एशिया संकट का असर: खाड़ी देशों में नेपाली मजदूरों के सामने रोजगार और सुरक्षा की दोहरी चुनौती

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब खाड़ी देशों में काम कर रहे नेपाली श्रमिकों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। हजारों मजदूर रोजगार और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की मुश्किल स्थिति में फंसे हुए हैं।
⚠️ सरकार की चेतावनी
नेपाल विदेश मंत्रालय ने संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे नेपाली नागरिकों से:
- अनावश्यक यात्रा से बचने
- अत्यंत जरूरी न हो तो वहीं रहने
की अपील की है।
👷 मजदूरों के सामने दोहरी चुनौती
खाड़ी देशों में काम कर रहे नेपाली श्रमिकों के सामने सबसे बड़ी दुविधा है:
- नौकरी बचाना या
- अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना
कतर में काम करने वाले एक श्रमिक ने कहा कि अगर वे नहीं लौटते हैं तो उनकी नौकरी जा सकती है, जबकि लौटने पर सुरक्षा को लेकर खतरा बना हुआ है।
💰 आर्थिक मजबूरी भारी
नेपाल में सीमित अवसरों के कारण:
- विदेश रोजगार ही मुख्य आय का स्रोत
- कई परिवार पूरी तरह इन मजदूरों पर निर्भर
सऊदी अरब में कार्यरत श्रमिकों ने भी बताया कि वे चाहकर भी घर नहीं लौट पा रहे, क्योंकि परिवार की जिम्मेदारी उन पर है।
🔄 श्रम स्वीकृति में बदलाव
सरकार ने पहले सुरक्षा कारणों से कई देशों के लिए श्रम स्वीकृति रोकी थी, लेकिन अब:
✔ कुछ देशों के लिए फिर से अनुमति दी गई
- यूएई
- कतर
- ओमान
- जॉर्डन
❌ अभी भी प्रतिबंधित देश:
- ईरान
- इज़राइल
- कुवैत
- इराक
📊 बढ़ रही है आवेदन संख्या
विदेश रोजगार विभाग नेपाल के अनुसार:
- रोजाना 1,000 से 1,100 लोग श्रम स्वीकृति के लिए आवेदन कर रहे हैं
🗣️ विशेषज्ञों की राय
नेपाल वैदेशिक रोजगार व्यवसायी संघ के अनुसार:
- संकट के समय सुरक्षा और रोजगार दोनों जरूरी
- सरकार को दोनों के बीच संतुलन बनाना होगा
⚖️ सरकार की रणनीति
श्रम, रोजगार तथा सामाजिक सुरक्षा मंत्रालय के मुताबिक:
- श्रमिकों की नौकरी बचाने के लिए आंशिक अनुमति दी गई
- सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निगरानी जारी






