नेपाल के नए प्रधान न्यायाधीश की सिफारिश का विरोध, कोर्ट की सुनवाई पर भी दिखा असर

नेपाल में नए प्रधान न्यायाधीश की सिफारिश को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। सर्वोच्च अदालत में वरिष्ठता क्रम को दरकिनार कर की गई सिफारिश का असर अब न्यायिक कार्यवाही पर भी दिखाई देने लगा है। शुक्रवार को हुई फुल कोर्ट बैठक के कारण दैनिक पेशी सूची निर्धारित समय से लगभग दो घंटे की देरी से जारी की गई।

प्रधान न्यायाधीश पद के लिए सिफारिश किए गए न्यायाधीश डॉ. मनोज कुमार शर्मा को आज सुनवाई से अलग रखा गया, जबकि कार्यवाहक प्रधान न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल ने स्वयं को पेशी से अलग कर लिया। इसके अलावा न्यायाधीश तिलप्रसाद श्रेष्ठ भी इजलास में शामिल नहीं हुए। हालांकि अन्य 15 न्यायाधीशों की बेंच का गठन किया गया।

गौरतलब है कि संवैधानिक परिषद ने गुरुवार को डॉ. मनोज कुमार शर्मा को प्रधान न्यायाधीश पद के लिए सिफारिश की थी। जबकि वरिष्ठता क्रम में सपना प्रधान मल्ल पहले स्थान पर थीं। इसके बावजूद चौथे क्रम के न्यायाधीश शर्मा का चयन किए जाने पर न्यायपालिका के भीतर विरोध के स्वर उठने लगे हैं।

फुल कोर्ट बैठक में कई न्यायाधीशों ने संवैधानिक परिषद के फैसले पर चिंता जताई और इसे न्यायपालिका के हित में नहीं बताया। वहीं कुछ न्यायाधीशों ने यह तर्क दिया कि संविधान के अनुसार तीन वर्ष पूरा कर चुके न्यायाधीश प्रधान न्यायाधीश बनने के पात्र होते हैं, इसलिए प्रक्रिया को पूरी तरह गलत नहीं कहा जा सकता।

बैठक में यह भी कहा गया कि यदि सिफारिश को लेकर कोई आपत्ति है, तो उसकी समीक्षा संसदीय सुनवाई समिति के स्तर पर की जा सकती है। फिलहाल इस विवाद का असर सर्वोच्च अदालत की नियमित कार्यवाही और सुनवाई प्रक्रिया पर साफ दिखाई देने लगा है।

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