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मुकेश खन्ना बोले- ‘जन गण मन’ हटाओ ‘वंदे मातरम्’ लाओ: राष्ट्रगान-राष्ट्रगीत में की गलतियां

मुंबई। अभिनेता मुकेश खन्ना ने राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को हटाकर ‘वंदे मातरम्’ को लाने की मांग की है। इसी बयान में उन्होंने राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को लेकर कई गलतियां भी कर दीं। हालांकि, ‘वंदे मातरम्’ पहले से ही भारत का राष्ट्रगीत है। वहीं ‘जन गण मन’ भारत का राष्ट्रगान है।

मुकेश खन्ना ने कहा – ‘मैं तीन साल पहले बोल चुका हूं कि वंदे मातरम को राष्ट्रगीत बनाओ । ये जन मन गण  हमारे देश का नहीं है। ये जो क्वीन एलिजाबेथ थीं, उनके मान में रवींद्रनाथ टेगौर ने एक स्तुति गान लिखा था, उसको हमने मान लिया, भाग्य विधाता, पंजाब सिंग । अरे ये हमारा नहीं है। हमारा है वंदे मातरम, लता जी ने गाया है।’

‘जन गण मन’ को ब्रिटिश दौर का बताया
मुकेश खन्ना ने ‘जन गण मन’ के इतिहास पर भी सवाल उठाए। उन्होंने इसे ब्रिटिश दौर और महारानी से जोड़ते हुए दावा किया कि यह भारत के लिए नहीं लिखा गया था। अपने बयान में उन्होंने ‘पंजाब सिंध’ का भी गलत उच्चारण किया।

सरकार ने दोनों को लेकर जारी किए निर्देश
केंद्र सरकार ने हाल ही में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को लेकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश जारी किए हैं। इसमें दोनों के सही शब्दों और उच्चारण के साथ तय नियमों के अनुसार गायन और वादन की बात कही गई है। किसी कार्यक्रम में दोनों गाए जाएं तो पहले ‘वंदे मातरम्’ और उसके बाद ‘जन गण मन’ होगा।

‘वंदे मातरम्’ का इतिहास
‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिम चंद्र चटर्जी ने की थी। बाद में इसे उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया गया। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत देशभक्ति और आजादी की लड़ाई का प्रमुख प्रतीक बन गया था। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने ‘वंदे मातरम्’ गाया था। आज यह भारत का राष्ट्रगीत है।

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