MPIDC ने मांगा पतंजलि कंपनी से निवेश का हिसाब: पीथमपुर में मिली है 40 एकड़ जमीन; 10 साल बाद भी नहीं लगा प्लांट

इंदौर। बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड को मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) ने पत्र जारी कर पीथमपुर में अब तक किए गए निवेश का ब्योरा मांगा है। यह कार्रवाई उस आवेदन के बाद हुई है, जिसमें कंपनी ने पीथमपुर में मिली 40 एकड़ औद्योगिक जमीन को पतंजलि फूड लिमिटेड के नाम ट्रांसफर करने की मांग की थी।
साल 2016 में इंदौर में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान पतंजलि समूह ने पीथमपुर में 500 करोड़ रुपए निवेश करने और बड़ा औद्योगिक प्रोजेक्ट स्थापित करने की घोषणा की थी। इसके बाद MPIDC ने सेक्टर-3 बगदून क्षेत्र में लगभग 1.68 लाख वर्गमीटर (करीब 40 एकड़) जमीन कंपनी को 99 साल की लीज पर आवंटित की थी।
10 करोड़ में मिली थी जमीन
MPIDC के रिकॉर्ड के अनुसार प्लॉट नंबर 804, 805, 806 और 807 पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड को दिए गए थे। जमीन की लीज राशि लगभग 10 करोड़ रुपए तय की गई थी, जबकि यह बाजार मूल्य से काफी कम मानी गई थी। कंपनी को हर साल करीब 12.50 लाख रुपए लीज रेंट देना था।

10 साल में प्लांट शुरू नहीं हुआ
जमीन आवंटन के बाद लंबे समय तक वहां कोई उत्पादन इकाई शुरू नहीं हो सकी। सूत्रों के अनुसार इस दौरान जमीन वापस लेने का प्रस्ताव भी दो बार तैयार हुआ, लेकिन मामला उच्च स्तर पर लंबित रहा।
इसी बीच पतंजलि समूह की दूसरी कंपनी पतंजलि फूड लिमिटेड सामने आई, जिसने पहले रुचि सोया इंडस्ट्रीज का अधिग्रहण किया था। इसके बाद पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड ने MPIDC भोपाल को आवेदन देकर जमीन को समूह की दूसरी कंपनी के नाम स्थानांतरित करने का अनुरोध किया।
MPIDC ने 19(बी) की शर्त लगाई
MPIDC के प्रबंध संचालक की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया कि दोनों कंपनियां एक ही समूह से जुड़ी हैं। नए प्रस्ताव के अनुसार पतंजलि फूड लिमिटेड पीथमपुर में करीब 450 करोड़ रुपए निवेश कर सकती है। प्रस्तावित परियोजना में बिस्किट निर्माण और सोयाबीन प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की योजना बताई गई है, जिससे लगभग 1600 लोगों को रोजगार मिलने का दावा किया गया है। हालांकि जमीन ट्रांसफर के लिए मप्र औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम, 2019 की धारा 19(बी) लागू की गई है।

पहले निवेश साबित करना होगा
नियम 19(बी) के तहत पहली शर्त यह है कि मूल आवंटी कंपनी को अपनी स्वीकृत परियोजना के अनुरूप निवेश का प्रमाण देना होगा। चूंकि पहले 500 करोड़ रुपए निवेश का प्रस्ताव दिया गया था, इसलिए कंपनी को कम से कम 125 करोड़ रुपए के स्थायी पूंजी निवेश या न्यूनतम 50 करोड़ रुपए निवेश का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा।
इसी आधार पर MPIDC इंदौर ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड को पत्र भेजकर पूछा है कि पीथमपुर की जमीन पर अब तक कितना स्थायी निवेश किया गया है। विभाग कंपनी से प्राप्त जानकारी की जांच करेगा।
ट्रांसफर के लिए करीब 5.50 करोड़ रुपए शुल्क संभव
यदि जांच में निवेश संबंधी शर्त पूरी पाई जाती है, तो जमीन ट्रांसफर की दूसरी प्रक्रिया शुरू होगी। इसके तहत लीज राशि का 10% और विकास शुल्क का 15% जमा करना होगा। वर्तमान दरों के अनुसार यह राशि लगभग 5.50 करोड़ रुपए हो सकती है। इसके अलावा रजिस्ट्री और अन्य शुल्क अलग से देय होंगे।

मांगलिया यूनिट को पीथमपुर शिफ्ट करने की तैयारी
सूत्रों के अनुसार समूह की मांगलिया स्थित रुचि सोया यूनिट को भविष्य में पीथमपुर स्थानांतरित करने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय कंपनी के जवाब और MPIDC की जांच के बाद ही लिया जाएगा।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि 2016 में घोषित 500 करोड़ रुपए के मुकाबले पीथमपुर में वास्तव में कितना निवेश हुआ। MPIDC अब इसी तथ्य की पुष्टि करने में जुटा है।