MP Weather Update: 30 जिलों में बारिश का अलर्ट, इंदौर, उज्जैन समेत 48 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे
मध्य प्रदेश में मानसून की देरी का असर साफ दिखाई दे रहा है। 1 जून से अब तक प्रदेश में औसतन 70.9 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन केवल 34.3 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य से 52 प्रतिशत कम है। इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर समेत 48 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा है।
कम बारिश का सीधा असर खरीफ फसलों की बोवनी पर पड़ रहा है। विशेष रूप से सोयाबीन की बुवाई प्रभावित हुई है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार बोवनी के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी जरूरी होती है, जो लगभग 4 इंच बारिश के बाद ही बनती है।
वर्तमान स्थिति में 4 इंच से अधिक बारिश केवल भोपाल जिले में दर्ज की गई है, जहां सामान्य से 53 प्रतिशत अधिक यानी करीब 4.6 इंच वर्षा हो चुकी है।
प्रदेश में मानसून के प्रवेश की सामान्य तिथि 15 जून मानी जाती है, लेकिन इस बार तय समय से 8 दिन बाद भी मानसून पूरी तरह नहीं पहुंच सका है। मौसम विभाग ने अगले 2 से 3 दिनों में मानसून के प्रदेश में प्रवेश की संभावना जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के सक्रिय होने के बाद तेज बारिश का दौर शुरू हो सकता है, जिससे वर्षा के आंकड़ों में तेजी से सुधार आएगा।
जून महीने में प्री-मानसून गतिविधियां जारी रहने के बावजूद प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में बारिश की भारी कमी दर्ज की गई है। जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में औसत से 71 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र सहित पश्चिमी हिस्सों में भी औसतन 33 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।
बारिश की कमी और मानसून की देरी से किसानों की चिंता बढ़ गई है। अब सभी की नजरें अगले कुछ दिनों में मानसून की सक्रियता और संभावित अच्छी बारिश पर टिकी हैं।
