महाकाल ने धारण किया चंद्र तिलक: रजत बेलपत्र से हुआ शृंगार; साकार स्वरूप में दिए दर्शन

उज्जैन। श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का विशेष पूजन और मनमोहक शृंगार किया गया। तड़के मंदिर के कपाट खुलते ही सबसे पहले वीरभद्र जी का पूजन कर स्वस्ति वाचन किया गया।
इसके बाद उनकी आज्ञा लेकर चांदी के द्वार खोले गए। गर्भगृह में पहुंचकर पुजारियों ने भगवान महाकाल का श्रृंगार उतारा और पंचामृत से अभिषेक-पूजन किया। दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक के बाद कपूर आरती हुई। इस दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल बना रहा।
अभिषेक के बाद विधि-विधान से हुआ पूजन
इसके बाद बाबा महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक कर विधि-विधान से पूजन किया गया। दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से भगवान का अभिषेक हुआ। इसके बाद ड्रायफ्रूट, फल और मिठाइयों का भोग अर्पित किया गया। भोग के बाद बाबा को भस्म चढ़ाई गई। भांग, चंदन और सिंदूर से श्रृंगार कर उन्हें आभूषणों से आकर्षक राजसी स्वरूप प्रदान किया गया।
शेषनाग मुकुट, चांदी की मुंडमाला से सजे महाकाल
भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा। भगवान महाकाल को रजत शेषनाग मुकुट, चांदी की मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की माला धारण कराई गई। उधर नंदी हॉल में नंदीजी का स्नान, ध्यान और विधिवत पूजन किया गया।
महानिर्वाणी अखाड़े ने भस्म अर्पित की
मंगल ध्वनियों के बीच हुई भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और बाबा के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से महाकाल को भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद बाबा निराकार से साकार स्वरूप में दर्शन देते हैं।