कांवड़ यात्री की हत्या के बाद भारत-नेपाल सीमा पर हाई अलर्ट: कई जिलों में कर्फ्यू; रेल सेवा बंद

काठमांडू। कांवड़ यात्री की हत्या के बाद भारत-नेपाल सीमा पर हाई अलर्ट है। कई जिलों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। हालात को देखते हुए रेल सेवा तक रोक दी गई है। प्रशासन ने लोगों के जुटने, प्रदर्शन और नारेबाजी पर पूरी तरह रोक लगा दी है। आदेश का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
नेपाल पुलिस प्रमुख दान बहादुर कार्की ने बताया कि भारत सीमा से नेपाल में शरणार्थियों के प्रवेश की आशंका को देखते हुए सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इसके साथ ही यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर जयनगर–जनकपुर–भंगहा रेल सेवा भी अस्थायी रूप से निलंबित कर दी गई है।
बताया जा रहा है कि हालिया हिंसा की शुरुआत एक कांवड़ यात्री की हत्या के बाद हुई, जिसके विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। फिलहाल नेपाल प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है।
कैसे शुरू हुआ विवाद
बीबीसी नेपाली सेवा के अनुसार तनाव की शुरुआत सुनसरी जिले के देवागंज स्थित कप्तानगंज में हुई। यहां कांवड़ यात्रा की तैयारी कर रहे कुछ लोगों ने दूसरे समुदाय की बस्ती के पास बिजली के खंभों पर झंडे लगाए और तेज आवाज में डीजे बजाया। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में विवाद बढ़ा और बाद में हिंसक झड़पें शुरू हो गईं स्थानीय प्रशासन का कहना है कि घटना एक मुस्लिम बस्ती के पास स्थित शिव मंदिर के आसपास हुई थी और झंडे तथा डीजे को लेकर विवाद ने सांप्रदायिक तनाव का रूप ले लिया।

गृह मंत्री पहुंचे प्रभावित क्षेत्रों में
नेपाल के गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने सुनसरी और देवागंज पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। मृतकों के परिजनों के साथ हुई बातचीत में सरकार ने निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और प्रभावित परिवारों को 10 लाख नेपाली रुपये मुआवजा देने का आश्वासन दिया है।
सरकार ने यह भी कहा है कि मृतकों को शहीद घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। साथ ही 20 जुलाई की रात हुई घटना की जांच और देवगंज-3 स्थित मदरसे की कानूनी स्थिति की भी जांच कराई जाएगी।
कई जिलों में नई पाबंदियां
तनाव के बाद प्रशासन ने कई जिलों में सार्वजनिक स्थानों पर डीजे के उपयोग पर रोक लगा दी है। धार्मिक और सार्वजनिक जुलूसों में हथियार या हथियार के रूप में इस्तेमाल हो सकने वाली वस्तुओं के प्रदर्शन पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
शुक्रवार तक सुनसरी, धनुषा और सिरहा के कुछ इलाकों से नारेबाजी और रैलियों की खबरें आती रहीं, जिसके बाद सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई।

नेताओं ने की शांति की अपील
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टराई ने हिंसा को राष्ट्रीय चिंता का विषय बताते हुए सभी राजनीतिक दलों और समुदायों से एकजुट होकर हालात सामान्य करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आपसी संघर्ष का फायदा बाहरी ताकतें उठा सकती हैं, इसलिए शांति और सामाजिक सद्भाव बनाए रखना जरूरी है।
विश्लेषकों का मानना है कि तराई-मधेश क्षेत्र में हाल के वर्षों में धार्मिक जुलूसों, शक्ति प्रदर्शन, मोटरसाइकिल रैलियों और तेज ध्वनि वाले आयोजनों के कारण समुदायों के बीच तनाव बढ़ा है। प्रशासन फिलहाल हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और लोगों से अफवाहों से बचने तथा शांति बनाए रखने की अपील की गई है।