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राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान भारत को बनाएंगे ग्लोबल टेक्नोलॉजी लीडर : डॉ. जितेंद्र सिंह

न राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विश्वास जताया कि देश के राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान आने वाले समय में भारत को “ग्लोबल टेक्नोलॉजी लीडर” बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि भारत विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब देश वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत तकनीकी पहचान स्थापित कर रहा है।

सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी अपने वीडियो संदेश में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ‘विज्ञान-टेक’ कार्यक्रम भविष्य में सहयोग आधारित अनुसंधान और नवाचार का एक आदर्श मॉडल बनकर उभरेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल यह दिखाने में मदद करेगी कि सार्वजनिक अनुसंधान किस प्रकार आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और वास्तविक समस्याओं के समाधान में प्रभावी भूमिका निभा सकता है।

केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की वैश्विक तकनीकी साख लगातार मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि आज देश जेनेटिक कोड की डिकोडिंग, अंतरिक्ष अनुसंधान, जैव प्रौद्योगिकी और उन्नत तकनीकी विकास जैसे क्षेत्रों में तेजी से नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। भारत की वैज्ञानिक प्रगति को अब विश्व स्तर पर गंभीरता से देखा जा रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आधुनिक तकनीक अब केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे आम नागरिकों के जीवन को प्रभावित कर रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि गहरे समुद्र में रोबोटिक्स तकनीक, सुनामी चेतावनी प्रणाली और आपदा प्रबंधन तंत्र जैसे नवाचार देश को अधिक सुरक्षित और सक्षम बना रहे हैं। वहीं, जैव-फोर्टिफाइड फसलें, स्वच्छ ऊर्जा और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत तेजी से आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ रहा है।

उन्होंने जानकारी दी कि जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित ‘विज्ञान-टेक’ कार्यक्रम इस वर्ष का प्रमुख आकर्षण रहेगा। इस कार्यक्रम में 14 मंत्रालय और विभाग अपने अनुसंधान संस्थानों के साथ एक मंच पर स्वदेशी तकनीकों का प्रदर्शन करेंगे। इसके साथ ही लैब-टू-मार्केट सफलता की कहानियों और भारत के मजबूत होते नवाचार तंत्र को भी प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे युवाओं और स्टार्टअप्स को प्रेरणा मिलेगी।

इस अवसर पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि 11 मई भारत के वैज्ञानिक इतिहास का गौरवशाली दिन है, क्योंकि इसी दिन वर्ष 1998 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में पोखरण परमाणु परीक्षण किया गया था, जिसने भारत को आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में वैश्विक पहचान दिलाई।

रिजिजू ने वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और नवप्रवर्तकों को देश की तकनीकी ताकत का आधार बताते हुए कहा कि उनका समर्पण भारत को विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में तकनीकी आत्मनिर्भरता सबसे अहम आधार बनने जा रही है।

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