किसी अन्य राज्य के सदन की कार्यवाही में हस्तक्षेप अस्वीकार्य : विजेंद्र गुप्ता

दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा है कि किसी अन्य राज्य की विधायिका की कार्यवाही में हस्तक्षेप पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने यह टिप्पणी लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन (AIPOC) को संबोधित करते हुए की। विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि ऐसा कोई भी हस्तक्षेप विधायिका की संवैधानिक स्वायत्तता को कमजोर करता है।

विधायिका के अधिकार क्षेत्र में ही होना चाहिए मामलों का निपटारा

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने सम्मेलन में बताया कि दिल्ली विधानसभा में हाल ही में हुई एक घटना पर सदन ने विधिवत संज्ञान लिया था और उसे विशेषाधिकार समिति को संदर्भित किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय की जांच स्थापित संसदीय प्रक्रियाओं के अनुरूप की गई, जिसमें सदन के सदस्यों की भावनाओं के अनुसार चर्चा, तर्क-वितर्क और निर्णय शामिल रहे।

सत्तापक्ष और विपक्ष की सहभागिता पर जोर

विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि जब किसी विधायिका में किसी विषय पर चर्चा होती है, तो उसमें सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों की भागीदारी होती है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जब दोनों पक्ष मिलकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचते हैं और उसका क्रियान्वयन अध्यक्ष के माध्यम से होता है, तो वह विषय अंतिम रूप ले लेता है।

6 जनवरी की कार्यवाही के संदर्भ में आई टिप्पणी

उल्लेखनीय है कि विजेंद्र गुप्ता की यह टिप्पणी 6 जनवरी को हुई दिल्ली विधानसभा की कार्यवाही के संदर्भ में आई है। उन्होंने पहले बताया था कि यह मामला विधानसभा की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग से जुड़ा है, जिसमें हाल ही में संपन्न शीतकालीन सत्र के दौरान सिख गुरुओं से संबंधित सदन की कार्यवाही के संदर्भ में विपक्ष की नेता आतिशी द्वारा कथित रूप से की गई टिप्पणियां शामिल हैं।

विशेषाधिकार समिति को सौंपा गया मामला

मामले की गंभीरता और सदस्यों द्वारा व्यक्त भावनाओं को देखते हुए विधानसभा ने इसे सदन के पटल पर औपचारिक रूप से संज्ञान में लिया और विशेषाधिकार समिति को संदर्भित किया। इस पूरे मामले की जांच संसदीय नियमों और परंपराओं के अनुसार सख्ती से की गई।

एफएसएल रिपोर्ट और सीबीआई जांच का संकेत

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि एफएसएल रिपोर्ट में तथ्य सामने आ चुके हैं और इस मामले को आवश्यकता पड़ने पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को भी सौंपा जा सकता है। साथ ही उन्होंने यह संकेत भी दिया कि सदन इस मामले में माफी पर विचार करने के लिए भी खुला है।

विजेंद्र गुप्ता ने दोहराया कि विधायी मामलों का निपटारा सदन के अधिकार क्षेत्र में ही होना चाहिए, और किसी भी प्रकार का बाहरी हस्तक्षेप न केवल अस्वीकार्य है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा के खिलाफ भी है।

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