इंदौर के उद्योगपति को ब्लैकमेल करने के मामले में हाईकोर्ट से राजेंद्र गुप्ता को नोटिस: ब्लैकमेलिंग और झूठी FIR के आरोप पर मांगा जवाब

इंदौर। आरटीआई एक्टिविस्ट राजेंद्र गुप्ता द्वारा शहर के प्रतिष्ठित उद्योगपति सूरज रजक को ब्लैकमेल कर 10 लाख रुपए की रंगदारी मांगने और पुलिस की कथित ‘एकतरफा कार्रवाई’ का मामला अब मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (इंदौर पीठ) पहुंच गया है। उद्योगपति सूरज रजक द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है और आरोपी आरटीआई एक्टिविस्ट राजेंद्र गुप्ता को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
धमकी देकर मांगे 10 लाख
बता दें, उद्योगपति सूरज रजक का आरोप है कि राजेंद्र गुप्ता ने वॉट्सऐप ग्रुपों में उनके खिलाफ मनगढ़ंत व मानहानिकारक सामग्री प्रसारित की। इसके बाद इसे वायरल करने की धमकी देकर फोन पर 10 लाख रुपए की मांग की गई।
पुलिस की ‘एकतरफा’ कार्रवाई
उद्योगपति ने 14 जुलाई को लसूड़िया थाने में ब्लैकमेलिंग, मानहानि और आईटी एक्ट के तहत लिखित शिकायत दी, लेकिन पुलिस ने इस पर कोई कदम नहीं उठाया। इसके ठीक विपरीत, राजेंद्र गुप्ता की शिकायत पर पंढरीनाथ थाना पुलिस ने बिना किसी प्रारंभिक जांच (धारा 173 के उल्लंघन) के उद्योगपति के खिलाफ ही आनन-फानन में एफआईआर दर्ज कर ली। पुलिस की एकतरफा कार्यप्रणाली के खिलाफ उद्योगपति ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। जिस पर अदालत ने पत्रकार के रूप में ब्लैकमेलिंग करने वाले राजेंद्र गुप्ता को नोटिस जारी किया है।
ब्लैकमेलिंग दबाने के लिए दर्ज कराई गई झूठी एफआईआर
उद्योगपति के अधिवक्ता अंशुमन श्रीवास्तव के अनुसार राजेंद्र गुप्ता की ब्लैकमेलिंग और रंगदारी को दबाने के लिए पुलिस प्रशासन का दुरुपयोग कर उद्योगपति पर झूठा केस दर्ज कराया गया है। नए कानूनी प्रावधानों (धारा 173) के तहत बिना जांच के दर्ज की गई एफआईआर पूरी तरह गैर-कानूनी है। हाईकोर्ट द्वारा जारी नोटिस से अब दूध का दूध और पानी का पानी होगा।