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इंदौर में स्ट्रेचर व्यवस्था पर फिर सवाल: जून 2026 में भी धूप में बीमार बच्चे को खुद खींचते दिखे थे माता-पिता

इंदौर। जिला अस्पताल में स्ट्रेचर नहीं मिलने और परिजनों द्वारा मरीज को सहारा देकर ले जाने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने अपनी सफाई दी है। सीनियर सर्जन डॉ. भूपेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि मरीज के परिजन गलती से अस्पताल के निर्माणाधीन गेट पर पहुंच गए थे, जहां से मरीज को अंदर लाने में दिक्कत हुई।

उन्होंने बताया कि मरीज बिजोलमर्ग क्षेत्र से ऑटो में अटल गेट तक आया था, लेकिन परिजन पीछे की ओर चले गए। वहां स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं दिखा, जिसके कारण स्थिति बनी और वीडियो वायरल हो गया।

पता चलते ही आगे बुलाकर स्ट्रेचर से भेजा
डॉ. शेखावत ने कहा, “जैसे ही मामला मेरे संज्ञान में आया, मैंने परिजनों को आगे बुलवाया। मरीज को ऑटो से निकालकर स्ट्रेचर पर अंदर भेजा गया। उस समय स्ट्रेचर और वार्डबॉय दोनों उपलब्ध थे।”

CMHO इंस्पेक्शन पर गेट पर ही मौजूद थे
सीनियर सर्जन के अनुसार घटना के समय सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी अस्पताल के निरीक्षण पर पहुंचे हुए थे। उनके साथ अस्पताल मैनेजर और आरएमओ भी मौजूद थे। उन्होंने कहा, “मैंने खुद महिला मरीज को ऑटो से उतारने में सहयोग किया। इसका वीडियो भी मेरे पास है।”

स्टाफ नहीं होने के आरोपों को बताया गलत
स्टाफ की अनुपस्थिति के आरोपों पर डॉ. शेखावत ने कहा कि अस्पताल में पूरा स्टाफ उपलब्ध रहता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में सार्थक ऐप के माध्यम से लोकेशन आधारित ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज की जा रही है, जिससे कर्मचारियों की मौजूदगी की निगरानी होती है।

स्वास्थ्य विभाग की टीम कर रही जांच
स्वास्थ्य विभाग की टीम जिला अस्पताल पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि तथ्यों के आधार पर पूरी स्थिति स्पष्ट की जाएगी।

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