खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले चिंताजनक: भारत ने जताई कड़ी चिंता, वैश्विक संकट की चेतावनी

खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हाल के हमलों को लेकर भारत ने गहरी चिंता व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि ये हमले न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य को अस्थिर करने वाले हैं और इन्हें तुरंत बंद किया जाना चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। सरकार एलपीजी की उपलब्धता पर लगातार नजर बनाए हुए है और घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही, ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों के उपयोग पर भी काम किया जा रहा है।

प्रवक्ता के अनुसार, बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव जैसे पड़ोसी देशों ने भारत से ऊर्जा सहायता की मांग की है, जिससे इस संकट की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

भारत ने पश्चिम एशिया के हालात पर अपना रुख भी स्पष्ट किया है। अफगानिस्तान में पाकिस्तान के हवाई हमलों की निंदा करते हुए भारत ने कहा कि असैन्य ढांचे को निशाना बनाना बेहद चिंताजनक है।

इसके अलावा, अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबाड के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत ने कहा कि पाकिस्तान का परमाणु प्रसार का इतिहास रहा है और उसकी गतिविधियां वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर भी सरकार सतर्क है। वर्तमान में इस क्षेत्र में भारत के 22 जहाज मौजूद हैं, जिन पर 611 भारतीय नाविक कार्यरत हैं। सरकार कंपनियों के साथ लगातार संपर्क में है और कई नाविक सुरक्षित वापस भी लौट चुके हैं।

ईरान में रह रहे भारतीय विद्यार्थियों को लेकर भी सरकार सक्रिय है। खासतौर पर कश्मीर की मेडिकल छात्राओं सहित सभी भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए प्रयास जारी हैं। विदेश मंत्रालय ने सलाह दी है कि जो भी भारतीय ईरान छोड़ना चाहते हैं, वे पहले भारतीय दूतावास से संपर्क करें।

भारत ने साफ किया है कि मौजूदा हालात में संवाद, कूटनीति और वैश्विक सहयोग ही समाधान का रास्ता है, ताकि ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय शांति को बनाए रखा जा सके।

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