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Exclusive: इंदौर निगम में 1 हजार करोड़ का घोटाला: नमामि गंगे योजना का काम सिर्फ रिकॉर्ड में; फाईलें गायब

आदित्य शुक्ला, इंदौर। इंदौर नगर निगम में अधिकारियों की अफसरशाही, जनप्रतिनिधियों और ठेकेदारों की कथित तिकड़ी ने केंद्र सरकार की महात्वाकांक्षी ‘नमामि गंगे योजना’ को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया है। कागजों में ड्रेनेज लाइन बिछाने और नाला टैपिंग की बाजीगरी दिखाकर करीब 1,000 करोड़ रुपये के महाघोटाले को अंजाम दिया गया है। मामले का सबसे सनसनीखेज पहलू यह है कि जैसे ही कैग जांच और आरटीआई का फंदा कसा, निगम रिकॉर्ड से 2,309 पृष्ठों की मुख्य टेंडर व मेजरमेंट बुक्स (एमबी) गायब कर दी गईं।

पूर्व पार्षद दिलीप कौशल ने 27 जुलाई 2026 को लोकायुक्त और सीबीआई (नई दिल्ली व भोपाल) में आपराधिक शिकायत दर्ज कराकर अधिकारियों, ठेकेदारों और कंसल्टेंट्स के खिलाफ तत्काल एफआईआर की मांग की है।

इन 4 खुलासों से हिली निगम की नींव

1. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने अपनी रिपोर्ट में बिना भौतिक सत्यापन (एमबी) के करोड़ों का भुगतान करने, बजट से अधिक राशि उड़ाने और घटिया एसटीपी प्लांट्स की पोल खोली है।

2. केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) के अनुसार, 117.31% भूजल दोहन से इंदौर ‘ओवर एक्सप्लोइटेड’ जोन में है। सीवेज प्रबंधन न होने से भूमिगत जल में जानलेवा नाइट्रेट घुल रहा है।

3. राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा कान्ह-सरस्वती नदी के संरक्षण हेतु दिए 33-33 मीटर ‘ग्रीन बफर जोन’ के नियमों को दरकिनार कर अनियोजित कंक्रीटीकरण हुआ और फर्जी बिल भुनाए गए।

4. आरटीआई के तहत जब नाला ट्रैपिंग और एसटीपी से जुड़े 2,309 पन्ने मांगे गए, तो निगम ने शुल्क जमा कराने के बाद लिखित में कबूल किया कि फाइलें उपलब्ध नहीं हैं/गायब हैं।

कागजों पर नदियां साफ, धरातल पर बह रहा ‘काला जहर’

  1. 2004–2007 – कबीटखेड़ी में एसटीपी और 22 किमी सीवर लाइन का काम शुरू हुआ।
  2. 2014–2018 – एनजीटी ने कान्ह को देश की सबसे प्रदूषित नदियों में डाला।
  3. 2016–2023 – 130 करोड़ की नाला ट्रैपिंग और 511 करोड़ के एनएमसीजी बजट से कागजों पर शहर को ‘वॉटर प्लस’ घोषित कर दिया गया।
  4. 2024 – विपक्ष ने ‘नदी सत्याग्रह’ कर ज़हरीली कान्ह के पानी में उतरकर दावों की हवा निकाली।
  5. 2025–2026 – कैग जांच और आरटीआई से खुलासा हुआ कि अरबों रुपये पानी की तरह बहाने के बावजूद 12 सालों में 10,000 करोड़ खर्च होने के बाद भी कान्ह में गाद और सीवेज भरा है।

ये आरोप लग रहे
– धरातल पर सीवर लाइन डाले बिना और नाला ट्रैप किए बिना फर्जी एंट्री कर करोड़ों का भुगतान लिया गया।
– कबीटखेड़ी और आजाद नगर के एसटीपी क्षमता के अनुसार काम ही नहीं कर रहे, बिना ट्रीट हुआ जहरीला पानी नदियों में गिर रहा है।
– कंसल्टिंग कंपनियों ने सांठगांठ कर फर्जी ‘वर्क कम्प्लीशन सर्टिफिकेट’ जारी किए।

अपराधिक षड्यंत्र का मामला
2,309 पन्नों के सरकारी रिकॉर्ड का गायब होना केवल लापरवाही नहीं, बल्कि भारतीय न्याय संहिता के तहत सबूतों को नष्ट करने और आपराधिक षड्यंत्र का सीधा मामला है। – दिलीप कौशल (पूर्व पार्षद व शिकायतकर्ता)

मुझे जानकारी नहीं
नमामि गंगे योजना का निगम से रिकॉर्ड है या नहीं, इस संबंध में मुझे जानकारी नहीं है। यह कार्य मेरे समय में नहीं हुआ है। अधिकारियों से जानकारी लेने के बाद ही कुछ कह सकूंगा। – क्षितिज सिंघल, निगमायुक्त, नगर निगम इंदौर

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