कच्चे तेल में उछाल: ब्रेंट 110 डॉलर के करीब, हॉर्मुज संकट से वैश्विक बाजार में हलचल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल जारी है। ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 97 डॉलर प्रति बैरल के पार कारोबार करता नजर आया।
मंगलवार को ब्रेंट क्रूड ने 108 डॉलर के स्तर से कारोबार की शुरुआत की और तेजी के साथ 109.46 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। हालांकि बीच में मामूली गिरावट के बाद यह फिर संभल गया और भारतीय समयानुसार सुबह करीब 9 बजे 109.20 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता दिखा।
इसी तरह डब्ल्यूटीआई क्रूड ने 96.62 डॉलर से शुरुआत करते हुए 97.55 डॉलर प्रति बैरल तक उछाल दर्ज किया। बाद में हल्की गिरावट के बावजूद यह 97 डॉलर के आसपास बना रहा।
विशेषज्ञों के अनुसार, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव और ईरान–अमेरिका के बीच टकराव के कारण कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत वहन करता है, ऐसे में यहां किसी भी बाधा का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ता है।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और शांति वार्ता में अनिश्चितता के चलते बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। भले ही ईरान ने बातचीत के लिए नया प्रस्ताव दिया है और अमेरिका ने उस पर विचार की बात कही है, लेकिन सप्लाई सामान्य होने के संकेत अभी नहीं मिले हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि युद्ध के कारण ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान हुआ है, जिसे पूरी तरह बहाल करने में लंबा समय लग सकता है। बंद पड़े तेल कुओं को फिर से शुरू करने, सप्लाई चेन को व्यवस्थित करने और रिफाइनरी स्टॉक बहाल करने में समय लगेगा, जिससे कीमतों पर दबाव बना रहेगा।
आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर भारत जैसे आयातक देशों पर अधिक पड़ेगा। इससे चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ सकता है, महंगाई में इजाफा हो सकता है और रुपये पर दबाव पड़ सकता है। साथ ही, निवेश बाजार में अस्थिरता और विदेशी पूंजी के बहिर्गमन की आशंका भी बढ़ सकती है।






