बिना शुगर और कोलेस्ट्रॉल के हो रही दिल से जुडी बीमारियां, जानिए कैसे होगा बचाव
हम अक्सर सुनते है कि किसी स्वस्थ व्यक्ति को अचानक दिल का दौरा आ जाता है। यह समस्या आम होती जा रही है। डॉक्टर के पास कई ऐसे मरीज आ रहे है जिनका बीपी, शुगर लेवल, कोलेस्ट्रॉल सब सामान्य होने के बावजूद उन्हें दिल से जुडी बीमारियां हो रही है। ऐसे केसेस में लिपिड प्रोफाइल की गड़बड़ी, बदलती जीवनशैली, नींद की कमी और बढ़ता वायु प्रदर्शन अहम कारण बन रहे है। हाल ही में हुए राष्ट्रीय अध्ययन भी इस बात की पुष्टि करते है। ऐसे में स्वयं को और अपने परिवार को इस गंभीर स्थिति से बचाने के लिए आपको इससे जुडी जानकारियां होना अति आवश्यक है।
यह बताते है आंकड़े
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) के हालिया अध्ययन में देशभर के 23,665 वयस्कों का स्वास्थ्य विश्लेषण किया गया। इसमें 87.3 प्रतिशत लोगों में कम से कम एक प्रकार की लिपिड असामान्यता (डिस्लिपिडेमिया) पाई गई। रिसर्च के अनुसार, करीब 35.5 करोड़ भारतीय ऐसे हैं जिनका ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और वजन सामान्य होने के बावजूद लिपिड प्रोफाइल असामान्य है। बड़ी संख्या में लोग खुद को स्वस्थ मानते हैं, जबकि उनके शरीर में कोलेस्ट्राल का संतुलन बिगड़ा हुआ है और भविष्य में हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।
नियमित रूप से लिपिड प्रोफाइल टेस्ट जरुरी
स्वस्थ रहने के लिए केवल ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की जांच कराना अब पर्याप्त नहीं माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि 30 वर्ष की उम्र के बाद नियमित रूप से लिपिड प्रोफाइल टेस्ट भी कराना चाहिए, खासकर उन लोगों को जिनके परिवार में हृदय रोग का इतिहास रहा हो या जिनकी जीवनशैली तनावपूर्ण और शारीरिक रूप से निष्क्रिय हो।
समय से पहले होने वाले हृदय रोगों (प्रीमैच्योर हार्ट डिजीज) में वायु प्रदूषण की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। इससे बचाव के लिए नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और प्रदूषण से बचने जैसी स्वस्थ आदतों को अपनाना बेहद जरूरी है।
इसलिए जरुरी लिपिड प्रोफाइल की जानकारी
लिपिड प्रोफाइल एक रक्त जांच है, जिसमें शरीर में मौजूद कुल कोलेस्ट्रॉल, एलडीएल (बैड कोलेस्ट्रॉल), एचडीएल (गुड कोलेस्ट्रॉल), ट्राइग्लिसराइड्स और वीएलडीएल का स्तर मापा जाता है। इनका असंतुलन धमनियों में चर्बी जमा होने का कारण बन सकता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
इन मानकों पर खरा उतरने के बाद ही कहलाएंगे फिट
आप स्वयं को फिट तभी मान सकते हो जब उम्र के अनुसार रोजमर्रा के सभी काम बिना कठिनाई के कर सकें। 40–60 वर्ष की आयु में कई दवाओं पर निर्भर न रहना पड़े। दिनभर ऊर्जा महसूस हो, खुलकर हंस सकें और रात में अच्छी नींद आए। तनाव, शिकायत और नकारात्मक सोच जीवन पर हावी न हो।
ऐसे करें दिल की जांच
हृदय की शुरुआती जांच के लिए लगभग 35 मिनट में 3 किलोमीटर पैदल चलें। चलते समय सीने में दर्द, भारीपन या सांस फूलने की वजह से रुकना न पड़े। वॉक पूरी होने के बाद अत्यधिक थकान महसूस न हो। यदि आप बिना किसी परेशानी के यह गतिविधि कर लेते हैं, तो हृदय की कार्यक्षमता सामान्य हो सकती है। हालांकि, किसी भी प्रकार की तकलीफ महसूस होने पर तुरंत हृदय रोग विशेषज्ञ से जांच कराना आवश्यक है।
जिम शुरू करने से पहले कराएं फिटनेस टेस्ट
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जिम जॉइन करने या भारी व्यायाम शुरू करने से पहले फिटनेस और हार्ट हेल्थ की जांच जरूर कराएं। ऐसा न करने पर छिपी हुई हृदय संबंधी समस्याएं गंभीर रूप ले सकती हैं, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।