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भोजशाला विवाद: हाई कोर्ट में एएसआई की भूमिका पर सवाल, इंटरवीनर पक्ष ने सर्वे रिपोर्ट को बताया संदेहास्पद

मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला विवाद मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में सोमवार को सुनवाई के दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए।

सुनवाई के दौरान इंटरवीनर पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मेनन ने दलीलें पेश करते हुए एएसआई की सर्वे रिपोर्ट को संदेहास्पद बताया। उन्होंने कहा कि एएसआई ने वर्ष 1998 में कोर्ट में दिए जवाब में यह स्पष्ट किया था कि भोजशाला मंदिर है या मस्जिद, इस पर कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता, लेकिन अब संस्था इसे मंदिर बता रही है, जो विरोधाभासी रुख दर्शाता है।

मामले की सुनवाई जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ में हुई। करीब दो घंटे चली सुनवाई में मेनन ने सरकार और एएसआई की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह मामला जनहित याचिका (PIL) नहीं बल्कि स्वामित्व (टाइटल सूट) का है, जिसकी सुनवाई सिविल कोर्ट में होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि याचिकाकर्ता संगठन हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस वर्ष 2021 में अस्तित्व में आया और 2022 में जनहित याचिका दायर कर दी, जो प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। साथ ही याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी द्वारा खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई और कहा कि उनके समाजसेवा के कार्यों का कोई विवरण कोर्ट में प्रस्तुत नहीं किया गया।

मेनन ने अदालत से मांग की कि अनुच्छेद 226 के तहत दायर इन याचिकाओं को खारिज करते हुए भारी कॉस्ट लगाया जाए, क्योंकि यह स्पष्ट रूप से दीवानी विवाद का मामला है। उन्होंने यह भी बताया कि 1997 में इसी तरह की याचिका सिविल सूट दायर करने की स्वतंत्रता के साथ वापस ली गई थी, लेकिन आज तक सिविल कोर्ट में कोई वाद दायर नहीं हुआ।

सुनवाई के दौरान एएसआई की ओर से अधिवक्ता सुनील जैन ने कोर्ट को जानकारी दी कि भोजशाला सर्वे की वीडियो फुटेज सील्ड हार्ड ड्राइव में प्रस्तुत की जा चुकी है और इसे ईआरपी सिस्टम पर भी अपलोड किया गया है, जिससे प्रतिवादी कमाल मौला मस्जिद वेलफेयर सोसायटी को देखने की सुविधा दी गई है।

इंटरवीनर पक्ष की दलीलें आगे भी जारी रहेंगी और मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को निर्धारित की गई है। भोजशाला विवाद को लेकर हाई कोर्ट में चार जनहित याचिकाएं और एक अपील पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद सुनवाई जारी है।

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