बैतूल में नाराज किसानों ने नष्ट की धनिया की फसल: 1 से 5 रुपए किलो तक मिल रहा भाव; सरकार से उचित मूल्य दिलाने की मांग
बैतूल। किसानों ने रोटावेटर चलाकर अपनी धनिया की फसल नष्ट कर दी। फसल के बेहद कम दाम मिलने से किसान नाराज है। सैकड़ों एकड़ में खड़ी हरी धनिया की फसल पर उन्होंने कल्टीवेटर चल दिया। कम पैसे मिलने से किसानों आर्थिक संकट में हैं।
आवक बढ़ने से घटे दाम
मामला मुलताई विकासखंड के ग्राम बरखेड़ का है। किसानों ने इस सीजन में बड़े पैमाने पर धनिया की खेती की थी। फसल तैयार होने पर किसानों को उम्मीद थी कि मंडी में अच्छा भाव मिलेगा। लागत के साथ मुनाफा भी होगा। लेकिन मंडियों में आवक बढ़ने के साथ ही धनिया के दाम तेजी से गिर गए।
1 से 5 रुपए किलो तक मिल रहा भाव
किसानों के मुताबिक बैतूल सब्जी मंडी और आसपास के स्थानीय बाजारों में धनिया महज 1 से 5 रुपए प्रति किलो के भाव बिक रहा है। ऐसे में खेत से फसल निकालने, मजदूर लगाने और मंडी तक वाहन से पहुंचाने का खर्च भी पूरा नहीं हो पा रहा है।
जेब से अतिरिक्त पैसा लगा रहे किसान
किसानों का कहना है कि मंडी में धनिया बेचने के बाद भी कई बार उन्हें अपनी जेब से अतिरिक्त पैसा लगाना पड़ रहा है। यही वजह है कि कई किसानों ने फसल काटकर मंडी ले जाने के बजाय उसे खेत में ही नष्ट करना बेहतर समझा।
बंपर पैदावार बनी परेशानी की वजह
कृषि जानकारों के मुताबिक इस सीजन में बारिश कम होने के बावजूद धनिया की फसल को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। मौसम अनुकूल रहने से क्षेत्र में धनिया की अच्छी पैदावार हुई। बड़ी मात्रा में फसल तैयार होने के बाद मंडियों में अचानक आवक बढ़ गई। मांग की तुलना में आपूर्ति ज्यादा होने से धनिया के भाव में भारी गिरावट आई। किसानों को जिस फसल से अच्छी आमदनी की उम्मीद थी, वही अब उनके लिए घाटे का सौदा बन गई है।
किसानों को आगे भाव बढ़ने की उम्मीद
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में मंडियों में धनिया की आवक कम होने पर कीमतों में कुछ सुधार हो सकता है। दाम बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है। हालांकि, किसानों का कहना है कि तब तक उनकी बड़ी मात्रा में फसल खेतों में ही खराब हो जाएगी या वे उसे नष्ट करने के लिए मजबूर होंगे।
सरकार से उचित मूल्य दिलाने की मांग
किसानों ने सरकार और कृषि विभाग से मांग की है कि फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं, ताकि किसानों को लागत से भी कम दाम पर अपनी उपज बेचने की मजबूरी से राहत मिल सके।