आलीराजपुर में भूमिपूजन के बाद भी नहीं बनी सड़क: विधायक ने गडकरी को भेजा पत्र; लिखा- बारिश में मरीजों को हो रही समस्या

आलीराजपुर। आम्बुआ-सेजवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग-56 के निर्माण को लेकर क्षेत्रवासियों का इंतजार खत्म नहीं हो रहा है। करीब 28 किलोमीटर लंबे मार्ग का भूमिपूजन 21 जनवरी 2024 को होने के बावजूद अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है।
सड़क की बदहाली और सिंगल लेन मार्ग से परेशान क्षेत्रवासियों की समस्या को लेकर जोबट विधायक सेना महेश पटेल ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी तथा मंत्रालय के सचिव को पत्र लिखकर निर्माण कार्य तत्काल शुरू कराने की मांग की है।
भूमिपूजन हुआ, लेकिन सड़क नहीं बनी
विधायक ने पत्र में कहा कि आम्बुआ–सेजवाड़ा मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग-56 के रूप में स्वीकृति मिल चुकी है। इसके बाद भूमिपूजन भी हो गया, लेकिन जमीनी स्तर पर निर्माण शुरू नहीं होने से क्षेत्र की उम्मीदें अब नाराजगी में बदल रही हैं। महत्वपूर्ण मार्ग होने के बावजूद परियोजना की देरी पर विधायक ने विभाग से जवाबदेही और शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।
बारिश में सड़क बन रही मुसीबत
मौजूदा सड़क सिंगल लेन और कई जगह खराब हालत में है। बारिश के दौरान स्थिति और बिगड़ जाती है। इससे वाहन चालकों के साथ ग्रामीणों को भी आवागमन में परेशानी होती है और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।
मरीजों को खराब सड़क से दाहोद तक सफर
विधायक ने पत्र में सबसे गंभीर मुद्दा स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ा बताया है। क्षेत्र के बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए गुजरात के दाहोद जाते हैं। गंभीर मरीजों और प्रसव पीड़ित महिलाओं को खराब सड़क से होकर अस्पताल पहुंचाना कई बार मुश्किल और जोखिम भरा हो जाता है। ऐसे में सड़क निर्माण में देरी को विधायक ने सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य और जनसुविधा से जुड़ा मामला बताया है।
अब जल्द काम शुरू कराने की मांग
विधायक सेना पटेल ने केंद्रीय मंत्री और मंत्रालय के सचिव से आग्रह किया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग-56 के आम्बुआ–सेजवाड़ा हिस्से का निर्माण प्राथमिकता से शुरू कराया जाए।
उनका कहना है कि सड़क बनने से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, दाहोद सहित गुजरात के अन्य क्षेत्रों तक पहुंच आसान होगी और मरीजों को समय पर उपचार दिलाने में भी मदद मिलेगी।भूमिपूजन के बाद भी सड़क का इंतजार अब क्षेत्रवासियों के लिए बड़ा सवाल बन गया है।
विधायक के पत्र के बाद देखना होगा कि मंत्रालय और संबंधित एजेंसी इस लंबित परियोजना पर कब तक जमीन पर काम शुरू करती है।