दिल्ली ब्लास्ट केस: जवाद सिद्द़की की गिरफ्तारी पर बोले मंत्री कैलाश विजयवर्गीय—“महू और इंदौर का नाम खराब किया, शिकायत मैंने विधायक रहते की थी”

इंदौर/दिल्ली।
दिल्ली में 10 नवंबर की देर शाम हुए कार ब्लास्ट मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है। इस धमाके में कई लोगों की मौत हुई थी, जिसके बाद NIAऔर अन्य जांच एजेंसियों ने मामले की छानबीन शुरू की। जाँच के दौरान एजेंसियों का फोकस फ़रीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी पर जाकर टिक गया, जहाँ से कई डॉक्टरों को हिरासत में लिया गया। इसी दौरान यूनिवर्सिटी के एक डॉक्टर ने खुद को कार सहित उड़ा लिया था।
जाँच में बड़ा मोड़ तब आया जब मामला अल फलाह यूनिवर्सिटी के मालिक जवाद सिद्द़की तक पहुँचा। ईडी की जांच में कई संदिग्ध फंडिंग और वित्तीय लेन-देन का खुलासा हुआ, जिसके बाद जवाद सिद्द़की को गिरफ्तार किया गया। जवाद मूल रूप से मध्यप्रदेश के इंदौर जिले के महू का रहने वाला बताया गया है।
कैलाश विजयवर्गीय का बयान: “शिकायत मैंने ही की थी, जवाद ने शहर का नाम खराब किया”
इस पूरे मामले पर मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा:
“जब मैं महू का विधायक था, तब लोगों ने मुझसे शिकायत की थी कि जवाद और उसके परिवार ने चिटफंड कंपनी बनाकर लोगों के करोड़ों रुपए लेकर फरार हो गए हैं। इस पर मैंने खुद पुलिस में शिकायत की थी और उसके परिवार के सदस्यों को गिरफ्तार भी किया गया था।”
मंत्री ने आगे कहा:
“जवाद सिद्द़की और उसके परिवार ने इंदौर और महू का नाम खराब किया है। उन्होंने जो पैसा लिया, उसे ऐसे कामों में लगाया कि सोचकर ही शर्म आती है। शिक्षा के नाम पर यूनिवर्सिटी बनाई और वहाँ आतंकी तैयार किए—यह अत्यंत खतरनाक है। सरकार मामले को गंभीरता से देख रही है और उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी।”
25 साल बाद फिर सामने आया नाम
बताया गया कि जवाद और उसके भाइयों ने वर्षों पहले एक चिटफंड कंपनी बनाकर लोगों से करोड़ों रुपए जमा किए और फरार हो गए थे। करीब 25 साल बाद दिल्ली ब्लास्ट की जांच में उसका नाम फिर सामने आया।
मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि देश एक बहुत बड़ी दुर्घटना से बच गया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सुरक्षा और फंडिंग नेटवर्क की बड़ी पड़ताल का कारण बन गया है, जिसकी जांच कई एजेंसियाँ मिलकर कर रही हैं।






