सरदार पटेल राष्ट्रहित प्रथम के विचार पर सदैव अडिग रहे: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

भोपाल, 31 अक्टूबर 2025।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने आज़ादी के बाद अपने दूरदर्शी नेतृत्व, अटूट इच्छाशक्ति और अदम्य देशभक्ति के बल पर भारत को एक सूत्र में पिरोया। उन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए 562 रियासतों का विलय कर भारत को एक अखंड राष्ट्र के रूप में संगठित किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव राष्ट्रीय एकता दिवस और सरदार पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर “एक दौड़ देश की एकता और अखंडता के लिए” रन फॉर यूनिटी कार्यक्रम में शौर्य स्मारक, भोपाल में उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया, सरदार पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और एकता दौड़ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
डॉ. यादव ने कहा कि सरदार पटेल किसान परिवार से निकलकर भारत की राजनीति में नायक बने। उन्होंने गांधीजी के आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई और बारडोली आंदोलन के बाद उन्हें “सरदार” की उपाधि मिली। चाहे नमक आंदोलन हो या भारत छोड़ो आंदोलन, सरदार पटेल ने सदैव राष्ट्र की एकता और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज़ादी के समय जब अंग्रेज़ों ने भारत को 562 रियासतों में बाँटने का षड्यंत्र रचा, तब सरदार पटेल ने अपनी कूटनीति, नीति और दृढ़ संकल्प से सभी रियासतों को एकजुट किया। उन्होंने भोपाल, जूनागढ़ और हैदराबाद जैसी रियासतों को भारत में शामिल कराकर भारत की अखंडता की नींव मजबूत की।
उन्होंने कहा कि गृह मंत्री के रूप में सरदार पटेल ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) जैसी संस्थाओं की नींव रखी। प्रशासनिक ढांचे को सुदृढ़ कर उन्होंने एकजुट भारत की स्थायी संरचना तैयार की।
डॉ. यादव ने कहा कि सरदार पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प समाज की भागीदारी से पूरा किया। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर निर्माण सरदार पटेल की एकता और आस्था की भावना को साकार करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरदार पटेल का मानना था कि भारत अपनी समस्याओं का समाधान स्वयं कर सकता है। आज प्रधानमंत्री मोदी उसी नीति पर अडिग हैं, और यही आत्मनिर्भर भारत की भावना है। केवड़िया में बनी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी केवल एक प्रतिमा नहीं, बल्कि भारत की एकता, अखंडता और आत्मगौरव का प्रतीक है।
डॉ. यादव ने कहा कि लोकतंत्र की सुंदरता यह है कि हम दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में कार्य करने वालों का सम्मान करें। सरदार पटेल का योगदान किसी दल का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र का है। उन्होंने जनता से आवाहन किया कि हम सभी अपने महापुरुषों के आदर्शों को स्मरण कर भारत की एकता और सम्मान की रक्षा का संकल्प लें।
कार्यक्रम में संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री धर्मेन्द्र लोधी, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, राज्य मंत्री कृष्णा गौर, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, महापौर मालती राय, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव शिव शेखर शुक्ला सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, युवा और छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे।






