राहुल गांधी बोले- इलेक्शन 2024 फेक: हमारे कानून गैरकानूनी; प्रोजेक्टर पर दिखाया मोदी-शाह का वीडियो

नई दिल्ली। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद गुरुवार को राहुल गांधी ने प्रेस कॉफ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने प्रोजेक्टर पर मोदी शाह का वीडियो दिखाया। कहा- हमारी चिट्ठी को बायपास किया…। जवाब नहीं दिया…। 2024 का इलेक्शन फेक था।
राहुल गांधी ने कहा- हमारे कानून गैरकानूनी हो गए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश ने वोट चोरी की है। मैंने उनकी नियुक्ति का विरोध किया था, लेकिन सरकार ने उन्हें ही चुना।
ये सिर्फ वोट पर हमला नहीं। ये बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला है। जो लोगों को अपना नेता चुनने का अधिकार देता है। वोटों की रक्षा करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। अगर वोट खत्म हो गया तो संविधान काम नहीं कर रहा है।
भाजपा के समय एंटी इनकेंबेसी गायब
राहुल गांधी ने कहा- यह हम सबके लिए एक सवाल है। हम समझ सकते हैं कि कोई आदमी पॉपुलर हो सकता है, लेकिन हमें ये नहीं समझ आता कि भाजपा के समय एंटी इनकेंबेसी गायब हो जाती है।
एंटी इनकंबेसी हर जगह होती है। हम जवाबों की तलाश कर रहे थे। हमें जवाब मिल गया है। वोट देश का फाउंडेशन है। वोट की रक्षा चुनाव आयोग करता है।
इससे संविधान को शक्ति मिलती है। इससे हमारे कानून बनते हैं। काननू से हमारे संस्था इवोल्व होती हैं। वोट को खत्म किया गया यानी संविधान को खत्म किया गया। राहुल बोले- हम चुप नहीं बैठेंगे हम आजादी के लिए लड़े थे। जब मैं 7 साल का था। तब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थी।

हिंदुस्तान में पहले कभी नहीं टूटी चेन
सवाल: आपकी सलाह नहीं मानी तो क्या आप सड़क पर उतरेंगे।
न्यूज एजेंसी ANI ने कहा– आपने कहा- ज्ञानेश कुमार को अप्रूवर बन जाना चाहिए। आपकी सलाह उन्होंने नहीं मानी तो क्या आप सड़कों पर उतरेंगे।
राहुल ने कहा- ये जो हालात हैं, ये भारत में कभी नहीं आए। वोट, कानून, संस्था और संविधान की चेन टूट गई है। मोदी और शाह अपनी जांच थोड़ी करेंगे। एक बार सिस्टम की रिपेयरिंग होगी तो जांच होगी। सबको पता है कि सिस्टम डैमेज हो चुका है।
जेन-जी नहीं देना चाहते बीजेपी को वोट
उन्हें पता है कि जेन जी उन्हें वोट नहीं देना चाहते। चुनाव आयोग का वोटर लिस्ट से कंट्रोल खत्म हो गया है। विश्वसनीयता खत्म हो गई है। इंटरनली वे मान भी रहे हैं।
सवाल: क्या कांग्रेस पूछेगी वोटर लिस्ट को कौन एडिट कर सकता है
राहुल ने कहा- कई लेवल पर ऐसा होता है। कई लोग यह काम कर सकते हैं। चुनाव आयोग जो कह रहा है, हम उसे नहीं मानेंगे, क्योंकि चेन ही टूट गई है। अगर वो चेन नहीं टूटती, वोटों की रक्षा होती, संस्था ठीक होती तो हम उनपर भरोसा करते।
वोट चोरी के दो तरीके
1- EVM
2- बूथ सिस्टम
हिंदुस्तान टाउम्स ने पूछा- आपको वोट चोरी के बारे में कब पता चला
सवाल: वोट चोरी को लेकर आपको कब पता चला कि ऐसा हो रहा है।
राहुल का जवाब: जब मैं 7 साल का था, 1977 में इंदिरा पीएम थीं। हर कोई जानता था, खुद उनको भी पता की वह हार जाएंगी। महसूस हो जाता है। आप एक बार गलत हो सकते हो, दो बार गलत हो सकते हैं, लेकिन बार-बार नहीं। दो तीन चुनाव ऐसे थे जब हम टेक्निकली देख रहे थे, तो कह रहे थे कि ऐसा नहीं हो सकता। धीरे-धीरे शक बढ़ने लगा। हम उस पर काम करने लगे।
इंडियन एक्सप्रेस का सवाल- विपक्ष आगे क्या करेगा
सवाल: अगर विपक्ष को पता है कि चुनाव आयोग में धांधली है तो आप लोग आगामी चुनावों में क्या करेंगे।
राहुल का जवाब: जैसा मैंने पहले बाताया कि देश ऐसे पॉइंट पर कभी नहीं आया था। अगर आप मानते हैं कि देश में एकता है तो ये आपका धर्म है। जानकारी सिर्फ हमारे पास नहीं है बहुत से लोगों के पास है। वह बाहर आएगी। हम शुरू से कह रहे हैं कि 3 साल से वोट चोरी हो रही है। चुनाव निष्पक्ष नहीं हो रहे हैं। कांग्रेस पहले से यह कह रही थी। आज चुनाव आयोग खुद भी यह कह रहा है। एक तरीके से इसे स्वीकार कर लिया गया है।
राहुल ने 2 प्रावधानों पर सवाल उठाए
1. चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर
इस कानून के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं। लेकिन राष्ट्रपति को इसके लिए एक चयन समिति की सिफारिश मिलती है। इस समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री की ओर से नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री होते हैं। यानी 3 सदस्यों वाली इस समिति में 2 सदस्य केंद्र सरकार की ओर से होते हैं।
2. चुनाव आयुक्तों को मिली कानूनी सुरक्षा पर
कानून की धारा 16 के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयुक्त ने अपने आधिकारिक काम के दौरान या आधिकारिक ड्यूटी निभाने का दावा करते हुए कोई काम, कार्रवाई या बयान दिया है, तो उससे जुड़े दीवानी या आपराधिक मामले को अदालत सुनवाई के लिए स्वीकार नहीं कर सकती और न ही उसकी सुनवाई जारी रख सकती है। यह सुरक्षा आधिकारिक काम से जुड़े मामलों के लिए है। इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें हर तरह के अपराध या हर स्थिति में गिरफ्तारी से पूरी छूट मिली हुई है।
वोटिंग सिस्टम को डैमेज करने के लिए ज्ञानेश जिम्मेदार
राहुल गांधी ने कहा- ज्ञानेश कुमार को पीएम मोदी और शाह ने चुना था। अब दो चुनाव आयुक्त कह रहे हैं कि ज्ञानेश कुमार वोटिंग सिस्टम में डैमेज के जिम्मेदार हैं। वोट चोरी से कानून चोरी होती है। वोट गया मतलब लॉ मेकिंग सिस्टम गया। अगर वोट चुराया गया है और सांसद संसद में बैठे हैं तो वे कोई भी कानून बनाएंगे, वह गलत होगा। उनके बनाए सभी कानून गैरकानूनी होंगे। मुझे कोई शक नहीं है कि 6 महीने के अंदर आपके सामने ये ब्लैक एंड व्हाइट होगा।
एंटी इनकंबेसी सभी पार्टियों के साथ हुई, मोदी के साथ नहीं
राहुल ने कहा कि कोई नेता ऐसे बयान नहीं दे सकता, क्योंकि भारत में फंडामेंटल फोर्स है। इंदिरा जी बांग्लादेश युद्ध जीतीं। अचानक एक साल के अंदर उनके खिलाफ एंटी इनकंबेसी आ गई। ऐसा फिर होता चला गया। एक के बाद एक नेताओं के साथ। लेकिन ऐसा कभी मोदी जी, शाह या भाजपा के नेता के साथ नहीं हुआ। यह हम सबके लिए एक सवाल है। हम समझ सकते हैं कि कोई आदमी पॉपुलर हो सकता है।

संविधान के दुश्मनों का पर्दाफाश
प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया हैंडल पर कहा लिखा- संविधान के दुश्मनों का पर्दाफाश हो चुका है। देश को न्याय मिलकर रहेगा।
23 सितंबर को जारी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों ने SIR को लेकर पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की।
इनमें से 4 आपत्तियां एक ही दिन दर्ज की गई थीं। लेकिन कोई एक्शन नहीं हुआ। आयोग ने इन आपत्तियों को सामान्य प्रक्रिया बताते हुए कहा है कि SIR समेत उसके सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
राहुल चुनाव आयोग पर वोट चोरी के आरोप में 2025 में तीन प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुके हैं। उन्होंने आयोग को सरकार की ‘B टीम’ भी कहा था। भाजपा के साथ वोट चोरी करने का आरोप लगाया था।

रिपोर्ट में दावा- चुनाव आयुक्तों ने आपत्तियां ज्ञानेश कुमार को भेजी थीं
इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 28 अक्टूबर 2025 से 14 अगस्त 2026 के बीच 14 बार आयोग के फैसलों पर लिखित आपत्ति दर्ज की।इनमें वोटर लिस्ट, Form-6, नए वोटरों और वोटर डेटाबेस से जुड़े मुद्दे शामिल थे। रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों की प्रतियां CEC ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गई थीं। यह विवाद जून 2025 से बिहार में शुरू हुए SIR के दौरान सामने आया।
