देवास के हाटपीपल्या में 127 साल पुरानी आस्था का महाआयोजन: 22 सितंबर को होगा भगवान नृसिंह का जल विहार; नृसिंह घाट तैयार

हटपिपलिया, देवास। डोल ग्यारस के महापर्व को लेकर हाटपीपल्या में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। 22 सितंबर को होने वाले ऐतिहासिक आयोजन के लिए नृसिंह घाट को विशेष रूप से सजाया गया है। यहां भगवान नृसिंह का पारंपरिक जल विहार होगा, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
127 साल से चली आ रही परंपरा
हाटपीपल्या का डोल ग्यारस उत्सव करीब 127 वर्षों से आयोजित होता आ रहा है। इस दिन भगवान नृसिंह की करीब 7.30 किलो वजनी पाषाण प्रतिमा को डोल में सजाकर नृसिंह घाट तक लाया जाता है। इसके बाद प्रतिमा का पारंपरिक जल विहार कराया जाता है। आयोजन को लेकर नगर में धार्मिक उत्साह का माहौल है। घाट पर श्रद्धालुओं की सुविधा और आयोजन की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
तीन बार जल में तैराई जाती है प्रतिमा
जल विहार के दौरान भगवान नृसिंह की पाषाण प्रतिमा को तीन बार जल में तैराया जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार प्रतिमा के तैरने की संख्या के आधार पर आने वाले वर्ष की स्थिति का आकलन किया जाता है।
मान्यता है कि यदि प्रतिमा तीनों बार तैरती है तो आने वाला वर्ष उत्तम माना जाता है। दो बार तैरने पर आठ महीने अच्छे रहने और एक बार तैरने पर चार महीने उत्तम रहने की मान्यता है।
संत और जनप्रतिनिधि होंगे शामिल
इस वर्ष के आयोजन में जगद्गुरु निम्बार्काचार्य पीठाधीश्वर श्याम शरण देवाचार्य श्रीजी महाराज विशेष रूप से शामिल होंगे। इसके अलावा विधायक मनोज चौधरी, सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी और भाजपा जिला अध्यक्ष राय सिंह सेंधव की मौजूदगी में जल विहार का आयोजन होगा।
नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि अरुण राठौड़ ने बताया कि नृसिंह घाट पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अब भगवान के डोल के पहुंचने और श्रद्धालुओं के आने का इंतजार है। 22 सितंबर को नृसिंह घाट एक बार फिर पारंपरिक जल विहार और धार्मिक आयोजन का साक्षी बनेगा।