धामनोद-बड़वाह फोरलेन के सर्वे से किसानों में असमंजस: मुआवजे की दर बढ़ाने की मांग; जमीन को सूखी बताने पर आपत्ति

धार। धामनोद-बड़वाह फोरलेन मार्ग के लिए भूमि सर्वे का काम शुरू हो गया है। सर्वे के साथ दावा-आपत्ति की प्रक्रिया भी चल रही है। किसानों ने जमीन के मुआवजे की दरों को लेकर कई आपत्तियां दर्ज कराई हैं। किसानों का कहना है कि उनकी जमीनों का मुआवजा पुराने रेट के आधार पर तय किया जा रहा है, जबकि वर्तमान में जमीन की कीमत काफी बढ़ चुकी है। किसानों ने वर्तमान गाइडलाइन और जमीन की वास्तविक स्थिति के आधार पर उचित मुआवजे की मांग की है।
MPRDC और राजस्व अमला कर रहा भूमि सर्वे
धामनोद-बड़वाह मार्ग के लिए MPRDC और राजस्व विभाग का अमला जमीनों का सर्वे कर रहा है। मौके पर सर्वे करने वाली कंपनी के जिम्मेदार अधिकारी भी पहुंचे। नायब तहसीलदार टप्पा कार्यालय के राजेश भिंडे, पटवारी, आरआई सहित संबंधित अधिकारियों ने किसानों से चर्चा कर उनकी आपत्तियां और दस्तावेजों की जानकारी ली।
किसानों ने अधिकारियों के सामने जमीन के मुआवजे की दर बढ़ाने की मांग रखी। उनका कहना है कि मौजूदा समय में जमीनों की कीमत लाखों रुपए तक पहुंच गई है, ऐसे में पुराने रेट के आधार पर मुआवजा तय किया जाना उचित नहीं होगा।
उपजाऊ जमीन को सूखी बताने पर भी आपत्ति
सर्वे के दौरान कुछ किसानों ने जमीन के रिकॉर्ड और श्रेणी को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई है। किसानों का आरोप है कि कुछ जमीनें उपजाऊ होने के बावजूद उन्हें सूखी जमीन के रूप में दर्ज किए जाने की बात सामने आ रही है। किसानों का कहना है कि इससे अधिग्रहण के दौरान मिलने वाली मुआवजा राशि प्रभावित हो सकती है।
नहर के किनारे आने वाली जमीनों को लेकर भी किसानों ने दावा-आपत्ति दर्ज कराई है। अधिकारी मौके पर किसानों से संबंधित दस्तावेज लेकर उनकी आपत्तियों की जानकारी जुटा रहे हैं।
एक किसान की जमीन पहले नहर में गई, अब रोड में जाने की चिंता
सर्वे को लेकर कई किसान असमंजस में हैं। किसानों के मुताबिक कुछ जगहों पर जमीन मालिक के नाम को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है और रिकॉर्ड में किसी दूसरे व्यक्ति का नाम दर्ज होने की बात सामने आ रही है।
एक किसान ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि पहले उसकी जमीन नहर परियोजना में चली गई थी और अब बची हुई जमीन सड़क के लिए अधिग्रहित होने की स्थिति में है। किसान का कहना है कि जमीन ही उसकी आय का प्रमुख साधन है और इसके चले जाने के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।
किसानों की मांग- वर्तमान दर के हिसाब से मिले मुआवजा
किसानों का कहना है कि यदि उनकी जमीन फोरलेन के लिए अधिग्रहित की जाती है तो उन्हें वर्तमान गाइडलाइन और जमीन की वास्तविक कीमत के आधार पर उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। किसानों ने सर्वे और आपत्तियों की प्रक्रिया में जमीन की स्थिति, सिंचित- असिंचित श्रेणी और वास्तविक भू-स्वामित्व का सही रिकॉर्ड दर्ज करने की मांग की है।
फोरलेन परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण और सर्वे की प्रक्रिया को समय पर पूरा करना प्रशासन के सामने चुनौती है। परियोजना को लेकर आगे की कार्रवाई किसानों की आपत्तियों के निराकरण और भूमि संबंधी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे बढ़ेगी।