उज्जैन में गणेश पूजा के बाद महालक्ष्मी माता की स्थापना: महाराष्ट्रीयन समाज वर्षों पुरानी परंपरा निभाई ; छप्पन भोग भी लगाया

उज्जैन। शहर में इन दिनों महाराष्ट्रीयन समाज के घरों में महालक्ष्मी माता की स्थापना का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। गणेश पूजा के बाद विधि-विधान से माता महालक्ष्मी की स्थापना की जाती है। करीब ढाई से तीन दिन तक चलने वाले इस पर्व में परिवार के सदस्य पूरे समर्पण के साथ माता की पूजा-अर्चना और सेवा करते हैं।
पीढ़ियों से निभाई जा रही परंपरा
पुजारी सुनील कुमार तिवारी ने बताया कि महालक्ष्मी माता की स्थापना महाराष्ट्रीयन समाज की प्राचीन परंपरा है। देशभर में बसे महाराष्ट्रीयन परिवार इसे पीढ़ियों से श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाते आ रहे हैं।
पर्व के पहले दिन सामान्य विधि-विधान से माता की पूजा की जाती है। इसके बाद दूसरे दिन घर में छप्पन भोग तैयार कर माता को अर्पित किया जाता है। इस दौरान सुहासिनी महिलाओं को सम्मानपूर्वक भोजन कराया जाता है और उन्हें भेंट देकर विदा किया जाता है।
सुख-समृद्धि और सौभाग्य की कामना
मान्यता है कि महालक्ष्मी माता घर में सुख-समृद्धि और सौभाग्य का आशीर्वाद देने आती हैं। इसी भावना के साथ परिवारजन माता को प्रसाद अर्पित करते हैं और भेंट बांटकर खुशियां साझा करते हैं।
महिलाओं का कहना है कि माता की पूजा में सबसे महत्वपूर्ण सच्ची श्रद्धा और भक्ति है। भक्त अपनी क्षमता के अनुसार माता को भोग अर्पित करते हैं। कई परिवारों में श्रद्धा के साथ छप्पन भोग भी लगाया जाता है।
देशभर में बसे महाराष्ट्रीयन परिवार मनाते हैं पर्व
पुजारी सुनील कुमार तिवारी ने बताया कि यह पर्व महाराष्ट्र की पुरानी धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। देश के अलग-अलग शहरों में बसे महाराष्ट्रीयन परिवार इसे अपनी पारिवारिक परंपराओं के अनुसार उत्साह और आस्था के साथ मनाते हैं। परिवार की महिलाएं और सदस्य मिलकर माता की पूजा, प्रसाद और सेवा से जुड़े आयोजन करते हैं।