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उज्जैन में महापौर को रथ से उतारने पर सियासत गरम: भाजपा नेता मनाने पहुंचे बंगले; कांग्रेस ने किया सम्मान

उज्जैन। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के रोड-शो के दौरान महापौर मुकेश टटवाल को रथ से नीचे उतारे जाने का मामला अब राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है। महापौर के विरोध के ऐलान के बाद भाजपा नेताओं ने उनसे मुलाकात की, वहीं कांग्रेस नेता भी शनिवार को उनके बंगले पहुंचे और सम्मान किया। दूसरी ओर बैरवा समाज की ओर से बैठक कर आगे की रणनीति पर मंथन किया जा रहा है।

रथ पर सवार हुए थे महापौर, कुछ देर बाद नीचे उतरने को कहा
17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर शिप्रा नदी किनारे आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन उज्जैन पहुंचे थे। उनके रोड-शो के लिए विशेष रथ तैयार किया गया था।

महापौर मुकेश टटवाल के अनुसार, वे हेलीपैड पर नितिन नवीन की अगवानी के लिए पहुंचे थे। उनका कहना है कि भाजपा के जिला प्रभारी बजरंग पुरोहित और कार्यक्रम प्रभारी जयपाल सिंह चावड़ा के कहने पर वे विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा के साथ रथ पर सवार हुए थे। कुछ देर बाद उन्हें रथ से नीचे उतरने के लिए कहा गया।

वहीं, उपलब्ध रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि हेलीपैड से रथ पर सवार होने वाले नेताओं की सूची में महापौर का नाम नहीं था, जबकि कार्यक्रम के मंच से जुड़ी सूची में उनका नाम बताया गया है। इस बिंदु को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।

20 सितंबर को अंबेडकर प्रतिमा के सामने बैठने का ऐलान
घटना से नाराज महापौर ने 20 सितंबर को सुबह 11 बजे से फ्रीगंज स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के सामने बैठकर विरोध जताने की बात कही है। उन्होंने कहा कि वे बाबा साहेब की प्रतिमा के सामने प्रार्थना करेंगे और जनता की ओर से मिली जिम्मेदारी को निभाने की शक्ति मांगेंगे। महापौर के ऐलान के बाद भाजपा नेताओं ने उनसे मुलाकात की।

प्रभारी मंत्री समेत भाजपा नेता महापौर के बंगले पहुंचे
शुक्रवार रात प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, सांसद उमेशनाथ और विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा समेत भाजपा नेताओं के महापौर के बंगले पहुंचने की जानकारी सामने आई है। बातचीत में महापौर ने घटनाक्रम को लेकर अपनी नाराजगी रखी और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की।

नेताओं की ओर से विरोध प्रदर्शन टालने का आग्रह किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इस मामले में भाजपा संगठन की ओर से विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया उपलब्ध रिपोर्टों में सामने नहीं आई है।

कांग्रेस नेता घर पहुंचे, माला-साफा पहनाकर किया सम्मान
शनिवार सुबह कांग्रेस विधायक महेश परमार, शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश भाटी, नगर निगम नेता प्रतिपक्ष रवि राय और बैरवा समाज अध्यक्ष सुरेंद्र मरमट महापौर के घर पहुंचे।

कांग्रेस नेताओं ने महापौर के साथ खड़े रहने की बात कही। विधायक महेश परमार ने कहा कि महापौर निर्वाचित जनप्रतिनिधि और शहर के प्रथम नागरिक हैं। उनके मुताबिक, किसी भी निर्वाचित जनप्रतिनिधि के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं होना चाहिए। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने महापौर को माला और साफा पहनाकर सम्मान किया।

बैरवा समाज में बैठक, आंदोलन को लेकर होगा फैसला
घटनाक्रम को लेकर बैरवा समाज की बैठक भी हुई। समाज की ओर से महापौर के साथ हुए व्यवहार पर नाराजगी जताई गई और आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। बैरवा समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामदयाल बड़ोदिया ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम की सूची में महापौर का नाम था और उन्हें रथ पर सवार होने के लिए बुलाया गया था, लेकिन बाद में उन्हें नीचे उतार दिया गया।

उन्होंने 20 सितंबर को सुबह 11 बजे अंबेडकर सर्किल पर धरने की बात कही है। जरूरत पड़ने पर दिल्ली के जंतर-मंतर तक आंदोलन करने की बात भी कही गई है। हालांकि, आगे की रणनीति पर समाज की बैठक के बाद अंतिम निर्णय लिया जाना है।

महापौर बोले- बाबा साहेब से मांगेंगे जिम्मेदारी निभाने की शक्ति
महापौर मुकेश टटवाल ने कहा है कि वे 20 सितंबर को अंबेडकर प्रतिमा के सामने बैठकर प्रार्थना करेंगे। उनके मुताबिक, वे अपमान सहन करने की शक्ति और जनता की ओर से मिली जिम्मेदारी को निष्ठा से निभाने की शक्ति मांगेंगे। टटवाल बैरवा समाज से आते हैं। उनके रथ से उतारे जाने के घटनाक्रम के बाद समाज की प्रतिक्रिया और कांग्रेस की सक्रियता से मामला स्थानीय राजनीतिक चर्चा में आ गया है।

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