PM मोदी से मुलाकात के 8 दिन बाद असगर अली को राहत: जमीन विवाद में कंपनी ने छोड़ा कब्जा, परमिट भी लौटाया
मुंबई। असगर अली वोहरा को लंबे समय से चल रहे जमीन विवाद में राहत मिली है। वोहरा ने 8 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर अपनी जमीन के मामले में मदद मांगी थी। इसके करीब 8 दिन बाद भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता से जुड़ी कंपनी ने विवादित जमीन से अपना कब्जा छोड़ने और निर्माण की अनुमति वापस करने की बात कही है।
वोहरा ने 1989 में भायंदर ईस्ट के नवघर इलाके में करीब 2,810 वर्ग मीटर जमीन खरीदी थी। उनका आरोप है कि बाद में फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन को दो हिस्सों में बांट दिया गया और दो निर्माण कंपनियों के नाम कर दिया गया।

15 साल से जमीन के लिए लड़ रहे थे
वोहरा करीब 15 साल से इस मामले को अलग-अलग सरकारी विभागों के सामने उठा रहे थे। उन्होंने इस मामले में 2015 में FIR दर्ज होने की भी बात कही है। वोहरा ने स्वयं बिल्डर्स और सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन्स का नाम लिया था। उन्होंने सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन्स को भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता से जुड़ा बताया था। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की स्थिति अलग हो सकती है।
PM मोदी से 8 सितंबर को हुई थी मुलाकात
असगर अली वोहरा ने 8 सितंबर को PM मोदी से मुलाकात की थी। उन्होंने जमीन विवाद में हस्तक्षेप करने और CBI जांच की मांग की थी। वोहरा और PM मोदी ने गुजरात के वडनगर स्थित B.N. स्कूल में साथ पढ़ाई की थी। मुलाकात के बाद इस पुराने जमीन विवाद को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी गतिविधियां तेज हुईं।
अधिकारियों ने कंपनियों को बुलाया
मीरा-भायंदर नगर निगम ने संबंधित कंपनियों के प्रतिनिधियों को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया था। मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी श्रीकर परदेशी की अध्यक्षता में भी बैठक हुई। इसमें असगर अली वोहरा, नरेंद्र मेहता और नगर निगम के अधिकारी मौजूद रहे।
कंपनी ने निर्माण परमिट सरेंडर करने की बात कही
बैठक के बाद सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड ने विवादित प्लॉट से पीछे हटने का फैसला बताया। कंपनी ने नगर निगम के टाउन प्लानिंग विभाग को पत्र देकर निर्माण की अनुमति से जुड़े दस्तावेज सरेंडर करने की बात कही।
कंपनी के मुताबिक, उसने 2019 में रजिस्टर्ड डीड के जरिए प्लॉट खरीदा था। अप्रैल 2026 में उसे निर्माण की अनुमति मिली थी। जमीन के मालिकाना हक को लेकर विवाद सामने आने के बाद कंपनी ने निर्माण अनुमति वापस करने का फैसला लिया।
नरेंद्र मेहता ने भी शिकायत वापस लेने की बात कही
नरेंद्र मेहता ने वोहरा और उनके सहयोगी के खिलाफ शिकायत वापस ले ली। मेहता ने दोनों पक्षों के बीच समझौते का भी उल्लेख किया है। पुरानी शिकायत में वोहरा और उनके सहयोगी पर अतिक्रमण और धमकी से जुड़े आरोप लगाए गए थे।
कंपनी के पीछे हटने और निर्माण अनुमति सरेंडर करने के फैसले से वोहरा को राहत मिली है। हालांकि, जमीन के मालिकाना हक और पुराने आरोपों से जुड़े सभी कानूनी पहलुओं को इससे अपने आप अंतिम रूप से तय नहीं माना जा सकता। मामले में आगे की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी।