आलीराजपुर में पटवारियों का प्रदर्शन: मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन; गिरदावरी को लेकर संघ ने विरोध जताया

आलीराजपुर। स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 योजना में पटवारियों को निष्पादक की जिम्मेदारी दिए जाने के विरोध में आलीराजपुर पटवारी संघ ने प्रदर्शन किया।
जिला अध्यक्ष के नेतृत्व में पटवारियों ने कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर स्पष्ट कर दिया है कि मांग नहीं मानी गई तो 15 सितंबर से काम से विरत रहेंगे और दबाव बढ़ने पर प्रदेशव्यापी कलमबंद हड़ताल की जाएगी।
पटवारी संघ का कहना है कि ग्रामीण आबादी क्षेत्र की भूमि का स्वरूप राजस्व कृषि भूमि से अलग है। इसका सर्वे पंचायत राज विभाग द्वारा कराया गया है, जबकि पटवारियों की भूमिका अब तक मौखिक सहबंद, मृतक प्रकरणों और मैदानी सहयोग तक सीमित रही है। ऐसे में पंजीयन दस्तावेज में पटवारी को निष्पादक बनाना विभागीय कार्य-विभाजन के विपरीत है।
एक हस्ताक्षर, पूरी कानूनी जिम्मेदारी!
संघ की सबसे बड़ी आपत्ति दस्तावेज पर पटवारी के नाम, पद और ई-सिग्नेचर को लेकर है। संघ का तर्क है कि भविष्य में सीमा, क्षेत्रफल, वारिसान, हिस्सेदारी या कब्जे को लेकर विवाद हुआ तो निष्पादक के रूप में पटवारी को व्यक्तिगत रूप से कानूनी जिम्मेदारी का सामना करना पड़ सकता है। जबकि पटवारी न तो उस अधिकार का स्वामी है और न ही हस्तांतरणकर्ता।
फार्मर आईडी और जिओ टैग गिरदावरी पर भी नाराजगी
संघ ने फार्मर आईडी का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश के पटवारियों ने किसान हितैषी योजना में कम समय में बड़ी संख्या में आईडी बनाकर उल्लेखनीय कार्य किया। शेष आईडी बनाना निरंतर प्रक्रिया है। तकनीकी दिक्कतों के बावजूद मानसिक दबाव बनाकर कार्रवाई करना उचित नहीं है।
गिरदावरी को लेकर संघ ने विरोध जताया
जिओ टैग गिरदावरी को लेकर भी संघ ने विरोध जताया है। संघ के अनुसार यह प्रक्रिया व्यवहारिक नहीं है। हाल ही में जिओ टैग गिरदावरी के दौरान एक युवा साथी की मौत का उल्लेख करते हुए संघ ने कहा कि जब तक जिओ डेटा संबंधी समस्या का समाधान नहीं होता, पटवारी गिरदावरी कार्य से विरत रहेंगे।
पुरानी मांगें भी बनीं विरोध की वजह
पटवारियों ने वेतन विसंगति, ग्रेड-पे और कैडर रिव्यू जैसी लंबित मांगों का भी मुद्दा उठाया। संघ का कहना है कि जिम्मेदारियां लगातार बढ़ाई जा रही हैं, लेकिन सेवा संबंधी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो रहा। संघ ने दो टूक कहा है कि 15 सितंबर से स्वामित्व योजना के निष्पादन एवं पंजीयन संबंधी दायित्व से प्रदेश का पटवारी संवर्ग विरत रहेगा। अत्यधिक दबाव बनाया गया तो कलमबंद आंदोलन किया जाएगा। संघ ने इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन पर डाल दी है।