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देवास में सोयाबीन की फसल को हुई ‘पीला मोजक’ बीमारी: किसानों पर आर्थिक संकट; मुआवजे की मांग

देवास। जिले के हाटपिपलिया क्षेत्र के ग्राम छिलकी व आसपास के गांवों में सोयाबीन की फसल पर अज्ञात और जानलेवा ‘पीला मोजक’ (Yellow Mosaic Virus) बीमारी फैल गई है।

कटाई व फसल पकने में महज 15 से 20 दिन का समय बचा था, लेकिन उससे ठीक पहले ही लहलहाते हरे खेत देखते ही देखते पीले पड़कर सूखने लगे हैं। इससे किसानों के सामने भारी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

फलियों में दाने पकाना बंद हुए 
स्थानीय किसानों का कहना है कि उन्होंने महंगे दामों (लगभग ₹10,000 प्रति क्विंटल) पर बीज खरीदकर बोवनी की थी। एक बीघा खेती में लगभग ₹20,000 से ₹25,000 तक की लागत आती है। फसल पकने की कगार पर थी, लेकिन बीमारी के कारण पौधे असमय ही पीले पड़कर सूख रहे हैं। सूखे पौधों की फलियों में दाने पकाना बंद हो गए हैं, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट आना तय है।

रोज के खर्चे निकालना भी हुआ मुश्किल 
किसानों ने बताया कि मंडी में सोयाबीन के उचित भाव (मात्र ₹3,000 से ₹4,000 प्रति क्विंटल) नहीं मिल पाते हैं। ऐसे में इतनी भारी लागत लगाने के बाद भी जब फसल ही बर्बाद हो जाए, तो परिवार चलाना, बच्चों की पढ़ाई, राशन-पानी का खर्च और बीमारी का इलाज करना बेहद कठिन हो गया है। कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।

अधिकारियों से खेतों का निष्पक्ष सर्वे कराया जाए
क्षेत्र के किसान राजवीर सिंह सेंधव ने मध्य प्रदेश सरकार और कृषि विभाग से गुहार लगाई है कि तत्काल अधिकारियों की टीम भेजकर प्रभावित खेतों का निष्पक्ष सर्वे कराया जाए। पीला मोजक बीमारी से हुई क्षति का आकलन कर किसानों को जल्द से जल्द राहत राशि/मुआवजा प्रदान किया जाए।

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