शिप्रा आरती विवाद में देशभर के पुरोहित जुटे: रामघाट की परंपरा बहाल करने की मांग; जंतर-मंतर पर आंदोलन की चेतावनी

उज्जैन। रामघाट पर मां शिप्रा की पारंपरिक आरती को लेकर प्रशासन और तीर्थ पुरोहितों के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। बुधवार को देशभर के प्रमुख तीर्थस्थलों से उज्जैन पहुंचे तीर्थ पुरोहितों ने शिप्रा तट पर पूजन-अभिषेक किया। इसके बाद अखिल भारतीय तीर्थ महासभा की बैठक में आरती की वर्तमान व्यवस्था को लेकर चर्चा की गई।
महासभा के अध्यक्ष आरके तिवारी ने कहा कि यदि पारंपरिक व्यवस्था बहाल नहीं की गई तो तीर्थ पुरोहित आंदोलन को उज्जैन से बाहर ले जाएंगे। उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन करने की चेतावनी भी दी।
शिप्रा पूजन के बाद जताया विरोध
बुधवार सुबह करीब 9:30 बजे अयोध्या, नासिक, प्रयागराज, हरिद्वार, त्र्यंबकेश्वर, बैजनाथ धाम और कुरुक्षेत्र समेत देश के अलग-अलग तीर्थस्थलों से आए पुरोहितों ने मां शिप्रा का विधि-विधान से पूजन और अभिषेक किया।
इस दौरान पुरोहितों ने रामघाट पर शिप्रा आरती की वर्तमान व्यवस्था पर आपत्ति जताई। उन्होंने वर्षों से चली आ रही पारंपरिक आरती व्यवस्था बहाल करने की मांग रखी। पूजन के बाद अखिल भारतीय तीर्थ महासभा की बैठक में आगे की रणनीति पर मंथन किया गया।
धर्मसभा में तय होगी आंदोलन की रणनीति
शिप्रा आरती को लेकर जारी विवाद अब धर्मसभा तक पहुंच गया है। श्री क्षेत्र पंडा समिति के अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी ने बताया कि बुधवार शाम शगुन गार्डन में देशभर से आए तीर्थ पुरोहितों और प्रतिनिधियों की बैठक होगी। बैठक में रामघाट की आरती व्यवस्था, महाकाल मंदिर समिति की भूमिका और प्रशासनिक हस्तक्षेप को लेकर चर्चा की जाएगी। साथ ही आगे के आंदोलन की रणनीति तय होगी। पुरोहितों का कहना है कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को उज्जैन से बाहर ले जाने का फैसला भी लिया जा सकता है।
एक महीने से चल रहा विरोध
शिप्रा आरती को लेकर विवाद करीब एक महीने पहले शुरू हुआ था। उस समय रामघाट पर महाकाल मंदिर समिति के बटुकों ने आरती कराई थी। वर्षों से पारंपरिक रूप से आरती कराने वाले तीर्थ पुरोहितों ने इसका विरोध किया। अगले दिन पुलिस और पुरोहित आमने-सामने आ गए थे। धक्का-मुक्की के बाद मामला और गरमा गया। इसके बाद से ही तीर्थ पुरोहित लगातार मौजूदा व्यवस्था का विरोध कर रहे हैं।
पुरोहितों का आरोप- आरती को ‘इवेंट’ बनाया जा रहा
तीर्थ पुरोहितों ने शिप्रा आरती की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि धार्मिक अनुष्ठान को अब आयोजन या इवेंट की तरह संचालित किया जा रहा है।
पंडित अमर डिब्बेवाला समेत अन्य पुरोहितों ने टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बटुकों से आरती कराना और इसे ठेके की प्रक्रिया से जोड़ना पारंपरिक स्वरूप में बदलाव है। पुरोहितों का कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन धार्मिक परंपराओं से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
हाईकोर्ट भी पहुंच चुका मामला
पारंपरिक शिप्रा आरती को लेकर चल रहा विवाद अब कोर्ट तक भी पहुंच गया है। श्री क्षेत्र पंडा समिति ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में याचिका दायर की है।
समिति ने आरती में शासन-प्रशासन के हस्तक्षेप पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही महाकालेश्वर मंदिर समिति पर परंपरागत आरती में बाधा डालने का आरोप लगाया है। याचिका में रामघाट पर पारंपरिक आरती निर्बाध रूप से जारी रखने की अनुमति मांगी गई है।