राजसी ठाट-बाट में कल निकलेंगे बाबा धारनाथ: 80वें वर्ष में प्रवेश करेगा ऐतिहासिक छबीना; 10 से ज्यादा झांकियां होंगे शामिल

धार। शहर के अधिष्ठाता बाबा धारनाथ सोमवार को राजसी ठाट-बाट के साथ नगर भ्रमण पर निकलेंगे। धार में बाबा धारनाथ के छबीने की परंपरा आजादी से पहले से चली आ रही है। इस वर्ष ऐतिहासिक छबीना 80वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। श्री धर्मस्थान रक्षक मंडल समिति के तत्वावधान में होने वाले आयोजन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस बार छबीने में 10 से अधिक झांकियां और 15 से ज्यादा चल समारोह शामिल होंगे।

स्थानीय कलाकार और युवा पिछले कई दिनों से झांकियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। ढोल-नगाड़ों, डमरू, झांझ और नासिक ढोल की गूंज के बीच बाबा धारनाथ नगर भ्रमण करेंगे। समिति अध्यक्ष शरद विजयवर्गीय के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर भगवान धारनाथ को वस्त्र अर्पित किए। मंडल सचिव अजय डॉ. मनोहर सिंह ठाकुर ने बताया कि नगर भ्रमण की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

सुबह से शुरू होगी विशेष पूजा
धारेश्वर मंदिर में सोमवार सुबह बाबा धारनाथ के पवित्र मुखौटे की विशेष पूजा-अर्चना शुरू होगी। दोपहर 2 बजे मुखौटे को राजसी पालकी में विराजित कर मंदिर परिसर में रखा जाएगा। दोपहर 3 बजे धर्मस्थान रक्षक मंडल समिति की ओर से आरती होगी। इसके बाद करीब एक घंटे तक श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे।  शाम 4 बजे कलेक्टर, एसपी सहित जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में महाआरती होगी। इसके बाद पुलिस प्रशासन बाबा को गार्ड ऑफ ऑनर देगा और छबीने की शुरुआत होगी।

मांझी समाज के युवा उठाएंगे पालकी
मंदिर परिसर के भीतर श्रद्धालुओं को पालकी को कंधा देने का अवसर मिलेगा। पालकी के मंदिर प्रांगण से बाहर निकलते ही परंपरा के अनुसार मांझी समाज के युवा इसे अपने कंधों पर उठाकर नगर भ्रमण कराएंगे।

बैलगाड़ी से शुरू हुई थी परंपरा
मंदिर समिति से जुड़े अजयसिंह ठाकुर ने बताया कि स्टेट टाइम में बाबा धारनाथ का छबीना बैलगाड़ी से निकाला जाता था। वर्ष 1946 के बाद बैलगाड़ी को केले के पत्तों से सजाकर ढोल-मंजीरों के साथ छबीना निकालने की परंपरा शुरू हुई।

उस समय शहर में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था नहीं थी। मोमबत्तियों की रोशनी में बाबा का छबीना नगर भ्रमण करता था। शुरुआत में समिति से जुड़े कुछ लोग ही इसमें शामिल होते थे। समय के साथ यह आयोजन धार की सांस्कृतिक पहचान बन गया।

35 फीट ऊंची होगी शिव परिवार की झांकी
इस बार छबीने में झांकियों की भव्यता खास आकर्षण रहेगी। एक्वा फ्रेंड्स क्लब द्वारा 35 फीट ऊंची शिव परिवार की झांकी तैयार की जा रही है। इसमें भगवान कार्तिकेय मयूर पर सवार और भगवान गणेश नृत्य करते हुए नजर आएंगे।

जागृति आर्ट के कलाकार प्रमोद गेहलोत पिछले एक महीने से झांकी को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इसमें 10 से अधिक रंगों की बदलती लाइटिंग भी होगी। झांकी के आगे राजस्थान और गुजरात के कलाकार विशेष प्रस्तुतियां देंगे।

वराह अवतार और हरि दर्शन की झांकी भी
सोमेश्वर महादेव मित्र मंडल करीब 15 फीट ऊंची भगवान विष्णु के वराह अवतार पर आधारित पारंपरिक झांकी तैयार कर रहा है। आजमालो ग्रुप (आशापालेश्वर महादेव) की ओर से हरि दर्शन पर आधारित चलित झांकी प्रस्तुत की जाएगी।

शिवगर्जना ग्रुप सहित अन्य युवा दल डमरू, झांझ और नासिक ढोल की विशेष प्रस्तुति देंगे। इसके लिए पिछले एक महीने से अभ्यास किया जा रहा है। छबीने के दौरान आकर्षक झांकियां, पारंपरिक वाद्य यंत्र और विभिन्न दलों की प्रस्तुतियां शहरवासियों के लिए प्रमुख आकर्षण रहेंगी।

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