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उज्जैन में बारिश में भरभराकर गिरा महाकाल द्वार: मंदिर से 100 मीटर दूर हादसा; चूने से हुआ था निर्माण

उज्जैन।  विश्व प्रसिद्ध श्री महाकाल मंदिर से रामघाट जाने वाले प्राचीन मार्ग पर स्थित ऐतिहासिक महाकाल द्वार देर रात अचानक ढह गया।

गनीमत रही कि हादसे के वक्त आसपास कोई मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा नुकसान टल गया। सुबह सूचना मिलने पर स्मार्ट सिटी के अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।

अधिकारियों का कहना है कि द्वार के पास निर्माण के लिए गहरी खुदाई जारी है। लगातार बारिश से मिट्टी में नमी बढ़ी और जमीन धंसने की स्थिति बनी, जिससे संरचना कमजोर होने की आशंका है।

देर रात हुआ हादसा
कार्यपालन यंत्री कमल सक्सेना के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में हादसा रात के समय हुआ  है। द्वार के आसपास गहरी खुदाई का काम चल रहा था, वहीं लगातार बारिश से जमीन भी प्रभावित हुई। ऐसे में मिट्टी के धंसने से द्वार के गिरने की आशंका जताई जा रही है।

कोई जनहानि नहीं हुई
राहत की बात है कि घटना में कोई जनहानि नहीं हुई। महाकाल मंदिर से करीब 100 मीटर दूर यह ऐतिहासिक द्वार रामघाट के पुराने रास्ते का अहम हिस्सा है। जर्जर होने से मार्ग लंबे समय से बंद था और स्मार्ट सिटी की मंदिर विस्तार योजना में 2.12 करोड़ का जीर्णोद्धार चल रहा था।

चूना से हो रहा निर्माण
महाकाल द्वार के जीर्णोद्धार में सीमेंट की जगह चूने का इस्तेमाल हो रहा था। चंदेरी और ललितपुर के कारीगर चूना, गुड़, मेथी, गूगल, उड़द का पानी, ईंट चूरा और रेत से पारंपरिक मिश्रण तैयार कर काम कर रहे थे।

निर्माण गुणवत्ता की जांच होगी 
माना जाता है कि यह ऐतिहासिक द्वार महाकाल मंदिर और रामघाट के बीच प्राचीन संपर्क मार्ग का अहम हिस्सा रहा है। द्वार ढहने के बाद अब निर्माण गुणवत्ता, आसपास की खुदाई और मिट्टी की मजबूती की जांच की जा रही है।

जानिए कितना पुराना है महाकाल द्वार
महाकालेश्वर मंदिर से कुछ ही दूर उत्तर दिशा में मौजूद महाकाल द्वार उज्जैन की प्राचीन विरासत का अहम हिस्सा है। 14वीं शताब्दी के शुरुआती दौर का यह द्वार बेसाल्ट पत्थर और ईंटों से निर्मित बताया जाता है। यहां मेहराबदार प्रवेश, पत्थर की सीढ़ियां, मंदिर से मिले नक्काशीदार अवशेष और पुराना रास्ता इसकी ऐतिहासिक पहचान हैं।

2004 में हुआ था सुधार कार्य
सदियों से यह मार्ग महाकाल मंदिर को रामघाट से जोड़ता रहा। अलग-अलग काल में इसका संरक्षण और जीर्णोद्धार हुआ। सिंधिया शासन और 2004 के सिंहस्थ के दौरान भी सुधार कार्य किए गए। वर्ष 2021 में स्मार्ट सिटी ने इसके पुनर्विकास की योजना लागू की थी।

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